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उपचार न मिलने से दम तोड़ रहे हैं पशु

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कंपिल। क्षेत्र के गांव बिल्हा और इकलहरा में बीमारी से 24 से अधिक मवेशियों की मौत हो चुकी है। कई मवेशी गला घोटू, निमोनिया और खुरपका से पीड़ित हैं। इससे दूध के कारोबार से जुड़े ग्रामीण परेशान हैं।
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गांव बिल्हा के लोगों की जीविका का मुख्य साधन गन्ना और दूध उत्पादन है। सर्दी के मौसम में मवेशियों में निमोनिया के साथ गला घोटू की बीमारी फैल रही है। सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर कहीं दिख नहीं रहे हैं। लोग जब तक प्राइवेट डॉक्टर को लाते हैं तब तक उनके मवेशी दम तोड़ देते हैं।
गांव बिल्हा में तो कई ग्रामीणों के दो से अधिक मवेशियों की मौत हो चुकी है। इससे उन्हें हजारों रुपये के नुकसान के साथ रोज की कमाई के दूध के कारोबार से भी हाथ धोना पड़ा। राजनेश के तीन, किशन कुमार के दो, कलक्टर की तीन, रामेश्वर, अतरसिंह, जितेंद्र, अजय, गुडडू, बबलू व सिंटू के मवेशी दम तोड़ चुके हैं। यही स्थिति गांव इकलहरा की है।
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कहने को यहां राजकीय पशु चिकित्सालय है, लेकिन डॉक्टर नहीं आते हैं। ग्रामीण हजारों रुपये खर्च कर बदायूं जिले के कस्बा कटरा से प्राइवेट डॉक्टर लाकर मवेशियों का उपचार कराते हैं।
मनवीर, राजपाल, रामनरेश, अवधेश आदि ग्रामीणों ने बताया कि एक माह में 24 से अधिक मवेशी मर चुके हैं, लेकिन उनके मवेशियों के उपचार की कोई व्यवस्था नहीं है। सीवीओ डॉ. राजकिशोर सिंह ने बताया कि उन्हें जानकारी नहीं थी। गांव में डॉक्टरों की टीम भेजी जाएगी।
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