पिता शान के साथ खड़ा अल्फैज। संवाद
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फर्रुखाबाद। सात वर्षीय अल्फैज को जन्मजात दिल की बीमारी से छुटकारा मिल गया है। इससे परिजन भी काफी खुश हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत इलाज में उनका पैसा भी खर्च नहीं हुआ।
शमसाबाद कस्बे के मोहल्ला गढ़ी निवासी शान के सात वर्षीय बेटे अल्फैज के दिल में जन्म से ही छेद था। वह दौड़ते समय हांफ जाता था। शान ने बेटे को सीएचसी पर ले जाकर आरबीएसके टीम की डॉ. कल्पना कटियार को दिखाया तो उन्हें बच्चे के दिल में छेद होने जानकारी हुई। इससे वह परेशान हो गए। डॉ. कल्पना ने अल्फैज को लोहिया अस्पताल रेफर किया।
जांच के बाद उसे अलीगढ़ की एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज के कार्डियोथोरासिक सर्जरी विभाग में भेज दिया गया। वहां प्रो. मो. आजम हसीन ने 22 नवंबर को ऑपरेशन किया। इसके बाद से बच्चा स्वस्थ है।
शान ने बताया कि उनसे छह यूनिट खून के 21 हजार रुपये खर्च हुए। ऑपरेशन व दवाई का कोई खर्चा नहीं लगा। फिलहाल बच्चा स्वस्थ है। एक बार उसे डॉक्टर को दिखाने जाना पड़ेगा। आरबीएसके की बदौलत उनके बेटे को नई जिंदगी मिली है।
मजदूरी कर घर खर्च चलाना मुश्किल है, इतना महंगा इलाज वह कैसे करा पाते। कार्यक्रम प्रबंधक अमित शाक्य ने बताया कि अप्रैल से अब तक 16 बच्चों को इलाज देकर ठीक किया जा चुका है।