फर्रुखाबाद। शहर या गांव किसी भी विद्युत उपकेंद्रों पर आग से निपटने के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। अधिकांश उपकेंद्रों पर बेकार अग्निशमन यंत्र रखे हैं और स्टैंड पर टंगी बाल्टियों से बालू गायब है। कुछ उपकेंद्रों पर अग्निशमन यंत्रों को स्टोर में कबाड़ की तरह डाल दिया गया है। अफसरों की अनदेखी से एक बार भी रिफिलिंग नहीं हुई है।
शहर व ग्रामीण क्षेत्र जिले में 38 विद्युत उपकेंद्र हैं। इसमें कायमगंज खंड क्षेत्र में 12, शहरी क्षेत्र में आठ और फर्रुखाबाद ग्रामीण खंड में 18 विद्युत उपकेंद्र हैं। इनमें लाखों रुपये की मशीनें व ट्रांसफार्मर लगे हैं। ट्रांसफार्मरों के पास जमीन पर सूखी घास है। लाइन में फाल्ट आने से उपकेंद्रों पर लगे ट्रांसफार्मरों व मशीनों मे आग लगने का आशंका रहती है। इसके बावजूद आग से बचाव को कोई खास इंतजाम नहीं हैं। उपकेंद्रों पर वर्ष 2018 में अग्निशमन यंत्र खरीद कर रखवाए गए थे। तीन साल में एक बार भी रिफिलिंग न होने से वे एक्सपायर हो गए हैं।
ग्रामीण खंड के बेवर रोड स्थित भोलेपुर विद्युत उपकेंद्र के अग्निशमन यंत्र टांगने की बजाय स्टोर में कबाड़ की तरह डाल दिए गए हैं। बालू भरी बाल्टी टांगने को स्टैंड बना है। इसमें एक बाल्टी टंगी है और चार गायब हैं। जो बाल्टी टंगी है, उसमें बालू नहीं है। शहरी क्षेत्र के फतेहगढ़ विद्युत उपकेंद्र पर चार अग्निशमन यंत्र लगे हैं। यह भी एक्सपायर हो चुके हैं। यहां बालू भरकर रखने के लिए बाल्टी ही नहीं है। डिवीजन कार्यालय परिसर में स्थित विद्युत उपकेंद्र पर एक अग्निशमन यंत्र लगा है। यह भी तीन साल पुराना है। यही हाल जिले के अन्य विद्युत उपकेंद्रों का है।
‘अग्निशमन यंत्र एक्सपायर हो गए हैं, इसकी जानकारी नहीं है। एसडीओ से इसकी रिपोर्ट ली जाएगी। अग्निशमन यंत्रों की रिफिलिंग कराई जाएगी।’-आरबी यादव, एक्सईएन शहरी
‘जिस अग्निशमन यंत्र में घड़ी लगी होती हैं। उसकी अवधि पांच साल की होती है। बिना घड़ी वाले अग्निशमन यंत्र की मियाद एक साल की होती है। उनको हर साल रिफिल कराया जाना चाहिए। इस मामले को दिखवाया जाएगा। -विजय प्रकाश त्रिपाठी, मुख्य अग्निशमन अधिकारी सीओ