मोहम्मदाबाद। रामकथा के नवम दिवस पर शांतनु महाराज ने अरण्यकांड की कथा का शुभारंभ किया। उन्होंने जयंत के मानभंग की कथा सुनाई। जहां नारद जी के समझाने पर जयंत ने भगवान श्रीराम से क्षमा याचना की और श्री राम ने उसे क्षमा प्रदान की। कथा में प्रभु श्रीराम के अत्रि ऋषि और माता अनुसूया के आश्रम जाने का प्रसंग सुनाया गया।
कथा के प्रसंग में श्रीराम ने ऋषियों द्वारा दिखाए अस्थियों के ढेर को देखकर प्रतिज्ञा ली कि वे इस धरती को राक्षसों से मुक्त करेंगे।कथा में शूर्पणखा के प्रसंग को रोचक व विनोदी ढंग से प्रस्तुत किया गया। गिद्धराज जटायु की शौर्यपूर्ण और मार्मिक कथा ने सभी को भावविभोर कर दिया।
माता शबरी की प्रतीक्षा और धैर्य को नवधा भक्ति के प्रसंग से जोड़ा गया। तत्पश्चात हनुमान जी द्वारा सुग्रीव से भेंट, सीता जी की खोज, समुद्र पर सेतु निर्माण, विभीषण की शरणागति और रावण वध की रोमांचक गाथा सुनाई गई। राम की अयोध्या वापसी, पुष्पक विमान से आगमन, भारत मिलन और राजतिलक के दृश्य ने समस्त वातावरण को भक्तिमय बना दिया। शिवमोहन सिंह, निशांत गुप्ता, रजनीश गुप्ता, शैलेश मिश्रा आदि रहे।