फर्रुखाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल परिसर में बने सरकारी आवास डीएम के आदेश के बाद भी अवैैध कब्जे से मुक्त नहीं हो सके। अभी भी 26 आवासों में लोग अवैैध रूप से रह रहे हैं। इन्हें बड़े अफसरों तक का खौफ नहीं है।
लोहिया अस्पताल में 156 आवास बने हैं। नियमानुसार इन आवासों को नियमित डॉक्टर और अस्पताल के अन्य स्टाफ को ही आवंटित किया जा सकता है। मगर, मनमानी इतनी है कि संविदा डॉक्टर व नर्स, ठेका कर्मचारी, वार्ड ब्वाय और सफाई कर्मचारी भी इन पर काबिज हो गए।
यही नहीं कुछ कर्मचारी सेवानिवृत्त होने व तबादले पर दूसरे जनपद में जाने के बावजूद इन्हीं आवासों में रह रहे हैं। कुछ ऐसे भी हैं, जो अपने मकानों में रह रहे हैं और अपने नाम के आवासों को रिश्तेदारों को दे रखा है। बाहरी लोगों के आवागमन से अस्पताल के लोगों में असुरक्षा पैदा हो गई है।
करीब 15 दिन पहले सीएमएस और फिर ब्लड बैंक के लैब टेक्नीशियन के साथ मारपीट की घटना के बाद प्रशासन हरकत में आया। सीएमएस की शिकायत पर डीएम संजय कुमार सिंह और एसपी अशोक कुमार मीणा ने 27 जून को अस्पताल पहुंचकर आवासों को खाली करने के निर्देश दिए थे।
28 जून को अवैध कब्जे वाले 31 आवासों पर नोटिस चस्पा की गईं। इसके बाद सीएमएस के पास मात्र दो आवासों की चाबियां ही पहुंचीं, जबकि तीन अन्य आवासों को लोगों ने खाली तो कर दिया लेकिन इनकी चाबियां अपने साथ लेकर चले गए। अभी भी 26 लोग अवैध रूप से सरकारी आवासों में रह रहे हैं।
डीएम की ओर से बनी कमेटी भी निष्क्रिय
आवासों को खाली कराने के लिए डीएम ने सिटी मजिस्ट्रेट, सीएमओ, सीओ सिटी समेत पांच अधिकारियों की कमेटी बनाई थी। इस कमेटी ने भी अभी तक आवासों को खाली कराने के प्रयास नहीं किए। इससे कब्जेदारों के हौसले बुलंद हैं।