फर्रुखाबाद। जनपद का लोधी वोट साधने के लिए एक बार फिर से बीजेपी ने सांसद मुकेश राजपूत पर ही दांव खेला है। इससे पहले भी बीजेपी ने लोधी नेता पर दांव खेल कर चुनाव में फतह हासिल की है।
फर्रुखाबाद लोकसभा सीट पर जनपद का सदर विधानसभा क्षेत्र, कायमगंज, अमृतपुर, भोजपुर के अलावा पड़ोसी जनपद एटा की अलीगंज का विधानसभा क्षेत्र आता है। इस लोकसभा सीट को हमेशा से लोधी बहुल माना जाता है। हालांकि शाक्य और यादव वोटरों की संख्या भी यहां पर अच्छी खासी है। ब्राह्मण और मुस्लिम मतदाता भी पार्टियों का गणित बिगाड़ने व बनाने के लिए काफी हैं। लेकिन बीजेपी के लिहाज से लोधी प्रत्याशी ही उनकी नैया पार लगा पाता है।
आलम यह है कि फर्रुखाबाद सीट से बीजेपी का खाता भी लोधी प्रत्याशी डॉ. सच्चिदानंद हरि साक्षी महाराज ने 1996 में खोला था। इसके बाद 1998 के चुनाव में भी वही संसद पहुंचे। इसके बाद 1999 में साक्षी महाराज और बीजेपी के रिश्ते खराब हो गए तो बीजेपी ने एक और लोधी नेता प्रोफेसर रामबख्श वर्मा पर दांव खेला। लेकिन रामबक्श वर्मा का टकराव बीजेपी से निष्कासित व लोधी बिरादरी में अच्छी पैठ रखने वाले साक्षी महाराज से हो गया। साक्षी महाराज ने जमकर बीजेपी का विरोध किया। इसका सीधा फायदा मिला सपा के चंद्रभूषण सिंह उर्फ मुन्नू बाबू को। इसी के साथ सपा का भी जनपद में खाता खुल गया।
2004 के चुनाव में बीजेपी ने पहली बार जिला पंचायत अध्यक्ष मुकेश राजपूत पर दांव खेला। लेकिन नाराज साक्षी महाराज फिर से बीजेपी की राह में रोड़ा बन कर खड़े हो गए। वह निर्दलीय चुनाव लड़े थे। हालात फिर वही रहे। इस बार भी मुन्नू बाबू जीत गए।
कांग्रेस प्रत्याशी लुइस खुर्शीद दूसरे और मुकेश को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा। 2009 में एक बार फिर जब लोकसभा चुनाव का बिगुल बजा तो इस बार बीजेपी ने कायमगंज नगर पालिका की तीन बार चेयरमैन रह चुकीं जनपद के सबसे बड़े उद्योगपति घराने की बहू मिथलेश अग्रवाल को टिकट दिया। इस बार नए परसीमन में मैनपुरी जनपद की भोगांव विधानसभा हटा दी गई थी। जबकि एटा जनपद की अलीगंज विधानसभा क्षेत्र को जोड़ दिया गया था। इस बार भी बीजेपी को मुंह की खानी पड़ी। कांग्रेस के सलमान खुर्शीद चुनाव जीत गए। मिथलेश अग्रवाल को चौथा स्थान मिला।
2014 के चुनाव आते आते बीजेपी में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह और साक्षी महाराज की वापसी हो गई। इसी का नतीजा था कि बीजेपी ने एक बार फिर लोधी कार्ड खेलते हुए मुकेश राजपूत को टिकट दिया। मोदी लहर में बीजेपी ने शानदार वापसी करते हुए सपा के रामेश्वर सिंह यादव को डेढ़ लाख वोट से हरा दिया।
इनसेट
दो बार सांसद रहे बीजेपी के टिकट पर हार गए
बीजेपी के लिए लोधी प्रत्याशी कितना महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पूर्व सांसद दयाराम शाक्य जनता पार्टी के टिकट पर लगातार दो बार 1977 और 1980 के आम चुनाव में जीते थे। लेकिन 1984 के चुनाव में बीजेपी ने पहली बार चुनाव लड़ा तो दयाराम शाक्य भी भाजपा के संग हो लिए। उन्हें फर्रुखाबाद से प्रत्याशी घोषित कर दिया गया। लेकिन कांग्रेस के खुर्शीद आलम खान ने उन्हें हरा दिया। इतना ही नहीं इसके बाद 1989 के चुनाव में जनता दल की लहर आई और इस बार दयाराम शाक्य को दूसरा स्थान भी नहीं मिला। इसी तरह 1991 में भी बीजेपी ने कुर्मी बिरादरी के अगुवा वीरेंद्र कटियार को चुनाव लड़वाया। इस चुनाव में भी बीजेपी को हार ही मिली।
कल्याण सिंह का भी रहता है पूरा दखल
राजस्थान के राज्यपाल और पड़ोसी जनपद एटा से दो बार सांसद रह चुके पूर्व मुख्यमंत्री व लोधी नेता कल्याण सिंह का भी फर्रुखाबाद सीट पर लोधी बहुल होने के कारण पूरा दखल रहता है। बताया जाता है कि कल्याण सिंह के कहने पर ही 2014 के चुनाव में मुकेश को टिकट दिया गया था।
जिसने जिताया हार की वजह भी बना
फर्रुखाबाद लोकसभा सीट से बीजेपी की जीत की शुरूआत डा. सच्चिदानंद हरि साक्षी महाराज थे। 1996 के चुनाव में उन्होंने ही यहां से बीजेपी का खाता खोला था। साथ ही दो बार सांसद बने थे। 1999 में जब बीजेपी से तल्खी हुई तो उन्होंने जमकर विरोध किया। इसी के चलते बीजेपी को हार का सामना भी करना पड़ा।
जिले में जातिवार अनुमानित मतदाता
यादव - 65 हजार
लोधी - 55 हजार
एससी - 45 हजार
शाक्य - 22 हजार
वैश्य - 22 हजार
मुस्लिम - 19 हजार