अमर उजाला ब्यूरो
फर्रुखाबाद। मार्च-अप्रैल में खुरपका का टीकाकरण अभियान चलाया गया था। इसके बावजूद शमसाबाद क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव में खुरपका फैल रहा है। एक ही ग्राम पंचायत में खुरपका से कई जानवर पीड़ित हैं। ग्रामीण बताते हैं कि गांव में डाक्टर आते ही नहीं हैं। ऐसे में विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शमसाबाद विकास खंड की ग्रामसभा झौआ के गांव छोटा झौआ, पाती नगला, पाल नगला और कठेरियन नगला में करीब एक सौ पशु खुरपका से पीड़ित हैं। विभाग का दावा है कि जिले में मार्च-अप्रैल में करीब साढ़े तीन लाख पशुओं में खुरपका का टीकाकरण किया गया है। झौआ के ग्राम प्रधान देवेंद्र यादव ने बताया कि गांव में 100 से ज्यादा पशु बीमार हैं। पिछले डेढ़ साल से यहां पर कोई डाक्टर नहीं आया है। टीकाकरण के नाम पर कुछ नहीं हुआ है। यदि गंगा किनारे बसी इस ग्राम सभा में टीकाकरण नहीं हुआ है, तो साढ़े तीन लाख टीके कहां लग गए।
शमसाबाद के पशु चिकित्सा अधिकारी डा. फूल बाबू ने बताया कि पूरे ब्लाक में टीकाकरण कराया गया था। जब उनसे पूछा गया कि शमसाबाद ब्लाक में कितने जानवरों को टीका लगाया गया था। तो वह कोई जानकारी नहीं दे सके। उन्होंने कहा कि वह हाल ही में यहां आए हैं। ज्यादा जानकारी नहीं है। प्रधान देवेंद्र यादव की एक भैंस, गोविंद सिंह, राजीव कुमार, चरन सिंह, रामनरायन, रामऔतार और रामशंकर की एक-एक भैंस खुरपका से पीड़ित है।
डेढ़ लाख पशुओं को लगा गलघोटू का टीका
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी की माने तो जिले में करीब डेढ़ लाख पशुओं को गलघोटू का टीका लगाया जा चुका है। गंगा किनारे के गांवों में पहले टीकाकरण किया जाता है। दूसरी ओर गंगा किनारे बसे गांव के ग्रामीणों का कहना है कि पिछले डेढ़ साल से कोई डाक्टर गांव में नहीं आया है।
गांवों में पानी आदि में भीगने से जानवरों में कोई समस्या आ गई होगी। टीकाकरण किया गया था। डाक्टरों के गांव में नहीं जाने की जानकारी नहीं है। मामला पता किया जाएगा। - राजकिशोर सिंह, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी