अमृतपुर। गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु के 10 सेमी. ऊपर पहुंच गया है। इससे गंगा के किनारे बसे गांवों में दोबारा बाढ़ का पानी भरने लगा है। बाढ़ग्रस्त गांवों में संक्रामक रोग भी पांव पसारने लगे हैं। नरौरा बांध से गंगा में 1.28 लाख क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है।
गंगा का जलस्तर रविवार को एक बार फिर चेतावनी बिंदु पार कर गया। गंगा का जलस्तर 136.70 मीटर पर पहुंच गया। यह चेतावनी बिंदु 136.60 मीटर से 10 सेमी. ऊपर है। नरौरा बांध से सुबह एक लाख 34 हजार 584 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जबकि शाम को छोड़े जाने वाले पानी मात्रा एक लाख 28 हजार 716 रह गई। गंगा का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ने लगी हैं।
गांव रामपुर, जोगराजपुर, कंचनपुर सबलपुर, लायकपुर, बमियारी, सुंदरपुर, कछुआ गाढ़ा, सैदापुर, करनपुर घाट, नगला दुर्गू, ऊगरपुर, हरसिंहपुर कायस्थ, माखन नगला, रामप्रसाद नगला, नगला मिघन आदि गांवों में दोबारा पानी भर गया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में बाढ़ का पानी फिर भरने से मुसीबतें बढ़ गईं हैं। पशुओं के चारे की दिक्कत है। ग्रामीण काफी दूर तक चारा लेने जाने को मजबूर हैं। लकड़ी व कंडा भीगने से भोजन बनाने में भी समस्या आ रही है।
आशा राम की मड़ैया के ग्रामीण सड़क किनारे अपने वाहन खड़े कर पानी से होकर घरों को जाते हैं। रामगंगा का जलस्तर 134.45 मीटर पर स्थित है। खो हरेली रामनगर से 6013 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
डीएम के आदेश पर गांव में नहीं जा रही स्वास्थ्य टीम
कई दिनों से गांव बाढ़ के पानी से घिरे होने से बीमारी फैलने लगी है। गांव आशा की मड़ैया के रामस्वरूप, मंजू, अगने, धर्मपाल, विनोद, सर्वेश, गोविंद, संदीप, गीता आदि लोग बुखार व खुजली से पीड़ित हैं। ऊगरपुर, हरसिंहपुर कायस्थ, सैदापुर, रतनपुर, नगला दुर्गू, सुंदरपुर, कछुआ गाढ़ा आदि गांव में बीमारी फैलने लगी है। 31 जुलाई को जिलाधिकारी डॉ.वीके सिंह ने बाढ़ क्षेत्र का भ्रमण कर सीएमओ को गांव में स्वास्थ्य टीम भेजने के आदेश दिए थे। इसके बाद भी गांव में स्वास्थ्य टीमें नहीं जा रही हैं।
टपुआ-चौड़ेरा मार्ग पर भरा पानी, आवागमन बंद
कंपिल। सिवारा मार्ग से करीब पांच किलोमीटर दूर गंगा की तलहटी में बसा ग्राम पंचायत रौकरी के मजरा टपुआ चौड़ेरा में करीब 700 की आबादी है। इस गांव में कोई पक्की सड़क नहीं है। कच्ची सड़क पर बाढ़ का पानी भर गया है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में स्कूल न होने से बच्चे पांच किमी. पैदल चलकर गांव रौकरी में पढ़ने जाते थे। मुख्य मार्ग पर बाढ़ का पानी भरा होने से कुछ बच्चे ही निकलकर स्कूल पहुंच पा रहे है। अधिकतर बच्चों की इन दिनों पढ़ाई बंद है। खेतों में पानी भरा होने से पशुओं के लिए चारे की दिक्कत है। बाढ़ पीड़ितों को अभी तक प्रशासन से भी कोई मदद नहीं मिली। (संवाद)