अयोध्या। कोरोना काल में लाखों की लागत से भेजे गए वेंटीलेटर उपयोग होने से पहले ही कबाड़ होने लगे हैं। जिला अस्पताल में पीएम केयर फंड से भेजे गए चार वेंटीलेटर में से दो स्टाफ की कमी से बिना इस्तेमाल के ही कबाड़ हो गये। अन्य अस्पतालों में वेंटीलेटर लगे तो हैं, लेकिन उन्हें चलाने वालों का इंतजाम नहीं है। ऐसे में उनका भी उपयोग नहीं हो रहा है।
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने जिले में भी खूब तबाही मचाई थी। ऑक्सीजन, बेड आदि को लेकर संकट खड़ा हुआ तो सभी अस्पतालों को तमाम हाइटेक संसाधनों से लैस करने की कवायद शुरू हुई। जिले के पांच जिला स्तरीय अस्पतालों के अलावा चार सीएचसी को भी संसाधनों से लैस करते हुए तमाम सुविधाएं बढ़ाई गईं।
अस्पतालों में सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम के जरिए बेड तक ऑक्सीजन पहुंचाने की व्यवस्था हुई। ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट लगाए गए। आईसीयू व पीआईसीयू बनाते हुए वेंटीलेटर भी दिए गए। जिला अस्पताल को 50 बेड का एल-2 अस्पताल बनाया गया। जिसमें चार बेड पर ऑक्सीजन सप्लाई दी गई। जबकि, चार वेंटीलेटर भी पीएम केयर फंड से भेजवाए गए।
जिन्हें इंस्टॉल भी कराया गया। दूसरी लहर के बाद यह समस्त तैयारियां की गईं लेकिन स्टाफ की व्यवस्था नहीं की गई। जबकि, चार वेंटीलेटर को चलाने के लिए तीन निश्चेतक, टेक्नीशियन, प्रशिक्षित स्टाफ नर्स आदि की आवश्यकता थी। तीसरी लहर में गनीमत रही कि मरीजों को इसकी जरूरत नहीं पड़ी।
इसके बाद भी स्टाफ की कमी के कारण आवश्यकता पड़ने पर भी उपयोग नहीं हो सका और मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ा। मौजूदा समय में स्थापित किए गए चार वेंटीलेटर में से दो कबाड़ हो चुके हैं। जिसकी मरम्मत के लिए कंपनी को पत्राचार किया गया, लेकिन अभी तक मरम्मत नहीं हो सकी है।
जिला महिला अस्पताल को भी 100 बेड का कोविड एल-2 अस्पताल बनाया गया है। इसमें 10 आईसीयू बेड व 40 पीआईसीयू बेड भी हैं। यहां भी 10 वेंटीलेटर लगाए गए हैं। लेकिन यहां भी स्टाफ की स्थायी तैनाती नहीं है। कोविड की लहर आने पर अस्थाई स्टाफ लगाए जाते हैं, लेकिन वेंटीलेटर स्थापित होने के बाद से इसकी जरूरत नहीं पड़ी है।
यह सभी वेंटीलेटर सिर्फ मॉकड्रिल के दौरान ही चलते हैं, इसके बाद से सब शोपीस बने रहते हैं। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आशाराम ने बताया कि 10 बेड के वेंटीलेटर को चलाने के लिए कम से कम 12 मेडिकल अफसर, छह निश्चेतक व अन्य स्टाफ होना चाहिए। बताया कि 24 स्टाफ को प्रशिक्षित भी किया गया है।
पीएम केयर फंड से चार वेंटीलेटर मिले थे। जिन्हें स्थापित किया गया था। इसे चलाने के लिए स्टाफ नहीं है। दो वेंटीलेटर उसमें से खराब हो गए हैं। जिसकी मरम्मत के लिए कंपनी व शासन को पत्र लिखा गया है। शीघ्र ही मरम्मत करने का आश्वासन कंपनी द्वारा दिया गया है। -डॉ. सीबीएन त्रिपाठी, सीएमएस, जिला अस्पताल, अयोध्या