अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि परिसर में भव्य राममंदिर निर्माण का काम जोरों पर चल रहा है। मंदिर की नींव के दूसरे फेज के तहत हो रही राफ्ट की ढलाई 90 प्रतिशत पूरी हो चुकी है। अप्रैल 2020 में जैसे ही श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का खाता खुला, मंदिर निर्माण के लिए भक्तों ने समर्पण निधि देनी शुरू कर दी।
रामलला के प्रति गहरी आस्था का ही परिणाम है कि डेढ़ साल के भीतर पांच हजार करोड़ से अधिक की समर्पण निधि मिल चुकी है। प्रख्यात कथावाचक मोरारी बापू ने सर्वाधिक 11 करोड़ दिए हैं तो महावीर ट्रस्ट पटना भी अब तक चार करोड़ दे चुका है।
खाता खुलने के बाद ट्रस्ट ने विज्ञापन व सोशल मीडिया के जरिए भक्तों से दान की अपील की थी। ट्रस्ट ने इस वर्ष 15 जनवरी से 27 फरवरी तक निधि समर्पण अभियान भी चलाया था। इस वर्ष मार्च में हुए ऑडिट की रिपोर्ट में 3500 करोड़ के दान की बात सामने आई थी लेकिन ट्रस्ट सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राममंदिर के लिए अब तक पांच हजार करोड़ से अधिक का दान मिल चुका है।
भक्तों में राममंदिर के प्रति आस्था का आलम यह है कि कोरोना काल में जब पूरा देश लगभग थम सा गया था तो वर्ष 2020 के अप्रैल व मई में 4.60 करोड़ का दान ट्रस्ट को मिला था। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट कार्यालय के प्रभारी प्रकाश गुप्ता बताते हैं कि निर्माण के लिए दान का सिलसिला जारी है। कार्यालय में प्रतिदिन हजारों की नकदी सहित चेक भी आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि अब तक राममंदिर के लिए प्रख्यात कथावाचक मोरारी बापू के भक्तों की ओर से सर्वाधिक 11 करोड़ का दान दिया गया है। महावीर ट्रस्ट पटना ने भी दस करोड़ देने का ऐलान किया गया है। मुख्य ट्रस्टी किशोर कुणाल ने पांच वर्ष तक हर वर्ष दो करोड़ रुपये राममंदिर के लिए देने की बात कही थी। ट्रस्ट की ओर से अब तक चार करोड़ रुपये का दान किया जा चुका है।
शिवसेना, उद्धव ठाकरे की ओर से एक करोड़, संघ कार्यकर्ता सियाराम की ओर से एक करोड़, चैतन्य सेवा ट्रस्ट मुंबई की ओर से एक करोड़ का दान किया जा चुका है। इससे पहले ट्रस्ट का खाता खुलने के बाद केंद्र सरकार ने एक रुपया व सीएम योगी ने भी 11 लाख का दान दिया था।
देश के बड़े उद्योगपतियों से ट्रस्ट ने अभी तक दान नहीं लिया है न ही विदेशी भक्तों द्वारा अभी तक राममंदिर निर्माण के लिए दान दिया जा सका है। विदेशी दान के लिए ट्रस्ट के पास एफसीआरए की वैधता होनी चाहिए, जो अभी नहीं है।
ट्रस्ट ने बड़े-बड़े उद्योगपतियों से भी अब तक राममंदिर के लिए दान देने की अपील नहीं की है, ट्रस्ट का कहना है कि अभी इसकी जरूरत नहीं। दूसरी तरफ विदेशी दान के लिए एफसीआरए चाहिए जिसके लिए तीन साल की ऑडिट रिपोर्ट अनिवार्य है। ट्रस्ट अभी तक तीन साल का नहीं हुआ है, इसलिए विदेशी दान प्राप्त करने में कुछ समय लगेगा।
ऑनलाइन माध्यम से बड़ी संख्या में लोग ट्रस्ट को दान भेज रहे हैं। अप्रैल में ट्रस्ट का खाता खुलने के बाद से अब तक करीब 15 हजार लोगों ने ऑनलाइन दान दिया है। रामभक्त नेटबैकिंग व आरटीजीएस टूल का भी प्रयोग कर रहे हैं। ट्रस्ट ने स्टेट बैंक, बीओबी व पंजाब नेशनल बैंक में खाता खोल रखा है। ट्रस्ट कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने बताया कि प्रतिदिन ऑनलाइन माध्यम से लाखों का दान आ रहा है।
राममंदिर निर्माण शुरू होने के साथ रामलला के चढ़ावे में भी तीन गुना की वृद्धि हुई है। राममंदिर के हक में फैसले के पूर्व एक माह में दस से 12 लाख का चढ़ावा आता था। फैसले के बाद चढ़ावा बढ़कर प्रतिमाह 25 से 30 लाख हुआ। जैसे ही राममंदिर का निर्माण शुरू हुआ रामलला के चढ़ावे में तीन गुना की वृद्धि हुई है।
अगस्त में रामलला के दान पात्र में एक पखवाड़े में 35 लाख का चढ़ावा आया तो वहीं सितंबर में एक नया रिकार्ड बना। चढ़ावे में दोगुना की वृद्धि हुई और चढ़ावा 76 लाख तक जा पहुंचा। अक्तूबर में भी रामलला को 82 लाख का चढ़ावा मिला है।