05-अयोध्या-रामलला का भव्य विग्रह
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अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य राममंदिर का निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा है। आगामी पांच अगस्त को राममंदिर के भूमिपूजन की पहली वर्षगांठ है। भूमि पूजन से लेकर अब तक कोरोना काल की विषम परिस्थिति में राममंदिर का निर्माण कार्य गतिमान रहा। राममंदिर की नींव भराई का आधे से ज्यादा काम पूरा हो चुका है। पांच अगस्त को भूमिपूजन की पहली वर्षगांठ के मौके पर रामजन्मभूमि में विविध अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है।
9 नवंबर 2019 को राम मंदिर के हक में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया था। 25 मार्च 2020 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टेंट में विराजमान रहे रामलला को अस्थायी मंदिर में प्रतिष्ठापित किया तो पूरे देश में खुशी छा गई। पांच अगस्त 2020 को देेश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब रामजन्मभूमि पर राममंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन किया तो देश ही नहीं विदेशों में उल्लास छा गया। रामनगरी अयोध्या सहित पूरे देश में उत्सव मना, लोगों ने दीप जलाकर खुशियां मनाईं। पूरी अयोध्या को इस तरह सजाया गया था कि त्रेतायुग साकार होता दिख रहा था।
आगामी पांच अगस्त को भूमिपूजन की पहली वर्षगांठ आ रही है। पहली वर्षगांठ को कोविड प्रोटोकाल के बीच भव्यता पूर्वक मनाने की तैयारी भी श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने शुरू कर दी है। श्रीरामजन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि राममंदिर के ट्रस्टी डॉ.अनिल मिश्रा से भूमिपूजन की पहली वर्ष गांठ पर विभिन्न आयोजनों को लेकर चर्चा हुई है। पांच अगस्त को वैदिक आचार्यों द्वारा राममंदिर परिसर में कलश स्थापना कर विशेष-पूजा, अर्चना की जाएगी। पूरे मंदिर परिसर को सजाने की भी योजना है। रामलला को विशेष भोग लगाकर प्रसाद वितरित किया जाएगा। सभी कार्यक्रम कोविड प्रोटोकाल के तहत होगें। हालांकि आयोजनों का निर्णय ट्रस्ट को ही लेना है।
पांच अगस्त का दिन प्रत्येक भारतीय के लिए अनंतकाल तक अविस्मरणीय रहेगा। इस दिन अयोध्या के नए युग का उस समय आगाज हुआ था जब पीएम नरेंद्र मोदी ने राममंदिर का भूमिपूजन किया था। पांच अगस्त को भूमिपूजन की पहली वर्षगांठ को लेकर ट्रस्ट के पदाधिकारियों व सुरक्षा एजेंसियों से वार्ता कर कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की जाएगी। अनुमति के बाद ही कोई आयोजन संभव होगा। डॉ. अनिल मिश्र, श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्टी