अयोध्या। अब स्कूल व कॉलेज छात्रों से बस का मनमाना किराया नहीं वसूल पाएंगे। प्रदेश सरकार ने नया फार्मूला जारी करते हुए वर्ष 2020-21 को आधार मानते हुए इस वर्ष भी 1648 रुपये अनुरक्षण शुल्क तय किया है।
यह नियम कक्षा एक से 12 तक के स्कूलों व शिक्षण संस्थाओं के नाम से पंजीकृत बसों पर लागू होगा। जुलाई माह में विद्यालय खुलने के बाद डीएम की अध्यक्षता में गठित जिला विद्यालय यान परिवहन सुरक्षा समिति की बैठक में इस नियम को कड़ाई से पालन कराने पर विचार किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश शासन ने साल 2020-21 को आधार मानते हुए इस साल भी स्कूल बसों पर अनुरक्षण शुल्क 1648 रुपये ही तय किया है। स्कूल बस संचालक इसी राशि को ध्यान में रखते हुए छात्रों से किराया वसूल सकेंगे।
स्कूल बसों के किराया को लेकर जारी आदेश के तहत जो फार्मूला तय किया गया है उनमें वर्तमान अनुरक्षण व्यय, कर्मचारियों के वेतन आदि पर खर्च में हुई बढ़ोतरी तथा वाहन में खर्च हुई बढ़ोतरी को मानक बनाया गया है।
स्कूल बसों को 47 सीटों की क्षमता वाली मानते हुए अनुरक्षण व्यय निर्धारित किया गया है। विद्यार्थियों से पांच किमी तक निर्धारित अनुरक्षण व्यय का 60 प्रतिशत किराया व पांच से 10 किमी. तक शत-प्रतिशत किराया लिया जाएगा।
इसी तरह 10 किमी. से ज्यादा दूरी तय करने पर छात्रों को निर्धारित शुल्क का 25 प्रतिशत ज्यादा किराया स्कूली बस को देना होगा। जबकि वातानुकूलित बस में 25 प्रतिशत किराया ज्यादा लिया जा सकता है।
विद्यार्थियों की सुरक्षा, परिवहन से संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श करने, प्रति विद्यार्थी किराया निर्धारित करने के लिए जनपद स्तर पर जिला विद्यालय यान परिवहन सुरक्षा समिति का गठन किया गया है।
इसका पदेन अध्यक्ष जिलाधिकारी व सचिव एआरटीओ प्रवर्तन होते हैं। इस वर्ष जुलाई माह में इस समिति की बैठक होगी, जिसमें इन मुद्दों पर विचार विमर्श किया जाएगा।
वर्तमान में जिले में 635 स्कूली बसें पंजीकृत हैं। इनमें से 258 बसों का फिटनेस टेस्ट न हो पाने के कारण उनका पंजीयन छह माह के लिए निरस्त किया जा चुका है। इसके अलावा 585 मैजिक व वैन भी पंजीकृत हैं।
इनमें से करीब 300 वाहनों का फिटनेस टेस्ट नहीं कराया जा सका है। इन वाहनों का स्कूल के स्टाफ को लाने के लिए उपयोग करना बताया जाता है, जबकि इसमें स्टाफ के साथ स्कूली बच्चों को भी स्कूल ले जाया जाता है।
इसका प्रति विद्यार्थी किराया स्कूल बस से कम नहीं है। एआरटीओ प्रशासन ने बताया कि जिला विद्यालय निरीक्षक व बेसिक शिक्षा अधिकारी के माध्यम से सभी स्कूल प्रबंधकों को सूचित कराया गया है कि वह स्कूल बस के ड्राइवर के लाइसेंस व चरित्र का सत्यापन करा लें।
साथ ही इसकी एक-एक प्रति आरटीओ कार्यालय को उपलब्ध करा दें। उन्हें निर्देशित किया गया है कि बिना फिटनेस व परमिट के किसी भी स्कूल वाहन का संचालन नहीं होना चाहिए। ऐसा होने पर उनके खिलाफ केस दर्ज कराया जाएगा।
बताया कि स्कूल बसों के मानकों की बुकलेट सभी स्कूल प्रबंधन को उपलब्ध करा दी गई है। स्कूल वैन स्टाफ को लाने के पंजीकृत कराई गईं हैं, यदि इनमें बच्चों को स्कूल ले जाते पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी। 16 जून के बाद स्कूल खुलने पर इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।