अयोध्या समेत जिलेभर में नाग पंचमी धूमधाम से मनाई गई। नागेश्वरनाथ, क्षीरेश्वरनाथ समेत जिले भर के शिवालयों में जलाभिषेक व दुग्धाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। पर्व पर जगह-जगह स्थानीय मेले भी लगे और दंगल आदि खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की गई। बच्चों ने गुड़िया पीट कर पर्व को मनाया।
मणिपर्वत मेले के साथ शुरू हुए प्रसिद्ध सावन झूला मेले के दूसरे पर्व नाग पंचमी को लेकर रविवार को भोर से ही अयोध्या में चहल-पहल बढ़ गई। भोर से ही सरयू के स्नान घाटों पर हर-हर महादेव और जय श्रीराम के नारे गूंजने लगे।
सरयू स्नान के बाद श्रद्धालुओं की भीड़ अयोध्या के प्रसिद्ध नागेश्वरनाथ, हनुमानगढ़ी, कनक भवन, क्षीरेश्वरनाथ महादेव, कोटेश्वरनाथ महादेव सहित अन्य मठ-मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए लंबी कतारें लग गई।
शिवालयों में देर शाम तक अनुष्ठान व पूजन-अर्चन का क्रम बना रहा। विवादित परिसर में विराजमान रामलला के दर्शन के लिए भी लोगों का तांता लगा रहा। रायगंज स्थित स्वर्णखरि कुंड पर नाग पंचमी का मेला लगा। श्रद्धालुओं ने मां सोना देवी, मां काली, मां शायर देवी की पूजा-अर्चना की।
इस अवसर पर परंपरागत दंगल का भी आयोजन किया गया, जिसमें आसपास के पहलवानों ने अपनी कुश्ती का जौहर दिखाया। अयोध्या में नयाघाट, रायगंज, टेढ़ीबाजार, फैजाबाद में रिकाबगंज, बेनीगंज, देवकाली, नियावां, सहादतगंज, नाका आदि स्थानों पर जगह-जगह बच्चों ने परंपरागत ढंग से गुड़िया पीट कर नाग पंचमी व गुड़िया पर्व मनाया।
तारुन प्रतिनिधि के मुताबिक क्षेत्र में नागपंचमी का पर्व धूमधाम व धार्मिक उल्लास के बीच मनाया गया। सुबह से ही शिवमंदिरों व शिवालयों में शिवभक्तों ने दुग्धाभिषेक व जलाभिषेक किया। महिलाओं ने नागदेवता की पूजा कर प्रतिकात्मक रूप से दूध पिलाया।
गांवों के तालाब व पोखरों में युवकों ने स्नान कर गुड़िया पीटी। इस मौके पर गांव की बेटियों ने कजरी व धार्मिक गीत गाकर लोक कला के जीवंत होने का अहसास भी कराया। नागपंचमी पर कई जगह मेला भी लगा व सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। बेलगरा के मेले में आल्हा गायन की प्रस्तुत की गई।