अयोध्या। दान-पुण्य की अमावस्या, मौनी अमावस्या का स्नान (आज) मंगलवार को होगा। प्रयागराज में स्नान करने के बाद अयोध्या आकर सरयू में डुबकी लगाने का महत्व शास्त्रों में वर्णित है।
इसी मान्यता के चलते प्रयागराज जाने वाले श्रद्धालु अयोध्या आकर स्नान-दान करते हैं। मौनी अमावस्या पर रामनगरी में स्नान-दान के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ने की संभावना है। इसको देखते हुए प्रशासन ने मंगलवार को अयोध्या में वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया है।
मौनी अमावस्या को लेकर रामनगरी में सोमवार शाम से श्रद्धालुओं के आने का क्रम भी शुरू हो गया है। पंडित कौशल्यानंदन वर्धन ने बताया कि माघ कृष्ण पक्ष की उदया तिथि चतुर्दशी 31 जनवरी दोपहर 2 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। उसके बाद अमावस्या तिथि लग जाएगी।
अमावस्या तिथि 31 जनवरी दोपहर 2 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर एक फरवरी को सुबह 11 बजकर 16 मिनट तक रहेगी। कहा कि वैष्णव नगरी में उदयातिथि की मान्यता है। इसलिए स्नान-दान की अमावस्या मंगलवार को ही मनाई जाएगी।
अमावस्या को लेकर प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। एसपी सिटी विजयपाल सिंह ने बताया कि मेला क्षेत्र में वाहनों का प्रतिबंध रहेगा। गोंडा व बस्ती से आने वाले वाहन नयाघाट तक ही आ सकेंगे।
शहर के श्रीराम अस्पताल से नयाघाट तक भी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। बताया कि सुरक्षा के लिए पुलिस बल की तैनाती की जा रही है। उन्होंने भक्तों से अपील की है कि मौनी अमावस्या पर कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए स्नान-दान करें।
पंडित कौशल्यानंदन वर्धन बताते हैं कि मौनी अमावस्या पर सूर्योदय से लगभग 60 मिनट पहले से मौन रहकर नहान शुरू करना विशेष फलदायी रहेगा। इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त में भी मौन स्नान करते समय काले तिल का दान श्रेयस्कर रहता है।
जो घाटों पर न जा पाएं, उन्हें घरों में ही जल में काले तिल डालकर मौन स्नान करना चाहिए। अमावस्या पर पितरों के निमित्त पीपल का पौधा लगाने से सुख-समृद्धि, संतान व धन मिलता है और पारिवारिक क्लेश खत्म होता है।