राहगीरों को जाम से निजात दिलाने के लिए शहर से लेकर कस्बों तक कई ओवरब्रिज बनना प्रस्तावित हैं। मगर अब तक ये सभी प्रस्तावों तक ही सीमित हैं। जीआईसी का ओवरब्रिज वर्ष 2012 में चालू हो गया था, जबकि 2013 से बन रहा रीडगंज-देवकाली ओवरब्रिज अभी भी अधूरा है।
इसी साल मार्च में इस ओवरब्रिज का लोकार्पण होना है। इसके चलते डीएम ने इसका निरीक्षण भी किया मगर काम की रफ्तार नहीं तेज हो सकी। रुदौली में एक व शहर में तीन ओवरब्रिजों की दरकार है। भेलसर-रुदौली मार्ग की रेल क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज निर्माण की स्वीकृति सन् 2013 में ही मिली थी।
मगर राज्य व केंद्र सरकार ने बजट नहीं दिया। रीडगंज का फ्लाईओवर अभी पूरा नहीं हो सका है। उप्र. राज्य सेतु निगम और रेलवे अपने-अपने हिस्से का पुल बनाने में जुटे हैं। अक्तूबर 2013 से बन रहे इस ओवरब्रिज की लागत 23 करोड़ रुपये से अधिक है।
उत्तर प्रदेश सेतु निगम नवंबर 2015 तक 15.13 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। उसे करीब 2.12 करोड़ रुपये की और दरकार है। इस ओवरब्रिज की लंबाई 587 मीटर है। रेलवे समपार संख्या 116 बी पर ओवरब्रिज बनने से अकबरपुर की ओर आने-वाले लोगों को जाम से निजात मिलेगी।
इस बाबत उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम के उप परियोजना प्रबंधक एसके गर्ग का कहना है कि विभाग की ओर से ओवरब्रिज पर इन दिनों स्लेब ढालने का कार्य चल रहा है। रेलवे भी अपने हिस्से के पुल का इन दिनों तेजी से निर्माण कर रही है। ऐसे में ओवरब्रिज के मार्च में चालू होने की उम्मीदें हैं।