क्षेत्रीय प्रयोगशाला गोरखपुर की रिपोर्ट आने के बाद खाद्य एवं औषधि विभाग में हड़कंप मच गया है। अभिहित अधिकारी मैगी के दूसरे नमूनों को सेंट्रल लैब में जांच के लिए भेजने की तैयारी शुरू कर दी है।
प्रदेश भर में मैगी के नमूने फेल पाए जाने के बाद, जिले से भी मई माह में मैगी के तीन नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। तीनों नमूने रीडगंज स्थित बलदेव प्लाजा के नारायण डिस्ट्रीब्यूटर्स से संकलित किए गए थे।
गोरखपुर लैब से जो रिपोर्ट आई है, उसके मुताबिक मैगी के निर्माण में नियमों की अनदेखी की गई है। लैब में आधुनिक मशीनें नहीं होने की वजह से मैगी में मिलाए गए लेड व अन्य हानिकारक तत्वों की जांच नहीं हो पाई है।
अब खाद्य एवं औषधि विभाग के अधिकारी मैगी की संकलित दूसरे नमूने को केन्द्रीय लैब में भेजने की तैयारी की है। अभिहित अधिकारी विनीत कुमार पांडेय ने बताया कि मैगी की गुणवत्ता संदिग्ध है।
जांच में गड़बड़ी पाई गई। कंपनी ने किस हद तक मिलावट व हेराफेरी की यह जानने के लिए सेंट्रल लैब में नमूने की दूसरी फाइल भेजी जा रही है। इस बारे में सेंट्रल लैब की रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।