अयोध्या। शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी ने इस्लाम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म अपना लिया है। रामनगरी के संतों ने वसीम रिजवी के हिंदू धर्म अपनाने पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे स्वागत योग्य कदम बताया।
संतों का कहना है कि जो मानवता का कल्याण चाहता है वहीं हिंदू धर्म को मानता है। हिंदू धर्म शाश्वत सत्य है। वसीम ने हिंदू धर्म में शामिल होकर सत्य को अंगीकार करने का काम किया है।
संतों ने यह भी कहा कि मुसलमानों के पूर्वज भगवान राम ही हैं ऐसे में रिजवी ने हिंदू धर्म अपनाकर पूर्वजों का भी मान बढ़ाया है। जगद्गुरु श्रीरामदिनेशाचार्य ने वसीम रिजवी के हिंदू धर्म अपनाने पर हर्ष व्यक्त किया है।
कहा कि सनातन का अर्थ है शाश्वत या हमेशा बना रहने वाला। सनातन धर्म केे अपनाने का मतलब है सत्य को अंगीकार करना। वसीम रिजवी ने हिंदू धर्म को अपनाकर सत्य को अंगीकार किया है।
महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा कि वसीम रिजवी द्वारा हिंदू धर्म अपनाना स्वागत योग्य है। पूरे विश्व मात्र के कल्याण के लिए हिंदू धर्म है। जो मानवता का कल्याण चाहता है वही हिंदू धर्म की ओर आकृष्ट होता है।
श्रीराम जन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि हिंदू धर्म व्यक्तिगत स्वतंत्रता भी सिखाता है। इसी स्वतंत्रता के क्रम में ही वसीम रिजवी ने हिंदू धर्म अपनाया है।
हिंदू धर्म में कहा गया है कि किसी को भी धार्मिक या सामाजिक बंधन में रखना उनकी चेतना के विस्तार को रोकना ही माना जाता है। उनका स्वागत है।
मुस्लिम विद्वान खालिक अहमद को वसीम रिजवी के हिंदू धर्म अपनाने पर कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारे संविधान में इसका अधिकार दिया गया है।
जिसे जिस धर्म में आस्था है वह उस धर्म को अपना सकता है, इसलिए हमें आपत्ति क्यों होगी। आपत्ति तो उन्हें होनी चाहिए जो हिंदू के मुस्लिम धर्म अपनाने पर परेशान हो जाते हैं।
आजम कादरी ने कहा कि वसीम रिजवी को उनके अवाम ने पहले ही बाहर का रास्ता दिखा दिया है। धर्म विरोधी कार्यों में संलिप्त रहने के चलते उनके खिलाफ फतवा भी जारी किया जा चुका है। उन्होंने हिंदू धर्म अपनाकर एक बार फिर से धर्म विरोधी काम किया है।