अयोध्या। कानपुर निवासी रघुवर दयाल मिश्र की मृत्यु के बाद उनकी इच्छानुसार शव को राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज, अयोध्या में छात्र-छात्राओं के प्रयोग के लिए भेजा गया। यह इस मेडिकल कॉलेज के लिए पहला देहदान है।
कानपुर के जेके कालोनी निवासी दंपती मनोज सेंगर व माधवी सेंगर ने मेडिकल साइंस में छात्र-छात्राओं के अध्ययन के लिए अभियान चलाया। उन्होंने अब तक 212 देहदान कराने का दावा किया है। इसी कड़ी में शिवकटरा कानपुर निवासी रघुवर दयाल मिश्र को भी देहदान के प्रेरित किया था।
उनकी पत्नी शांति मिश्रा, पुत्र करुणाशंकर मिश्रा व संजीव मिश्रा की सहमति से उन्होंने युग दधीचि अभियान के तहत संकल्प पत्र भरकर देहदान का संकल्प लिया था। इनका देहावसान बीते रविवार को हो गया, तो उनके परिवारीजनों ने उनकी इच्छानुसार देहदान किया।
मेडिकल साइंस में छात्र-छात्राओं की सुगमता के लिए पहली बार छह और महादानी आगे आए हैं। इनको सोमवार को राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज गंजा के हॉल में संकल्प दिलाया गया है।
समारोह में देवकाली निवासी शिक्षाविद् दंपती अमरनाथ तिवारी एवं सुनीता तिवारी सहित छह लोगों ने सोमवार को देहदान के लिए संकल्प लिया। अमरनाथ तिवारी मौजूदा समय में वे भीखापुर स्थित अमर पब्लिक स्कूल में प्रधानाचार्य हैं।
उनके अलावा मेडिकल कॉलेज की एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ अलका सिंह, उनकी माता इंदु सिंह पत्नी रामदवन सिंह, मिर्जापुर जनपद के मेवालाल, गोरखपुर निवासी रजनीश कुमार ने भी देहदान के लिए संकल्प लिया। इस मौके पर मेडिकल कॉलेज प्राचार्य प्रोफेसर विजय कुमार, जनरल सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ सत्यजीत वर्मा, प्रभारी सीएमओ डॉ सीबी द्विवेदी, डॉ देवजीत शर्मा, डॉ योगेश यादव, डॉ दीपक सक्सेना, डॉ एनसी गोयल आदि मौजूद रहे।
मेडिकल कॉलेज में सोमवार को आयोजित देहदान शपथ समारोह एवं शंका समाधान गोष्ठी में मनोज सेंगर ने कहा कि मानव शरीर की आंतरिक संरचना के अध्ययन के लिए चिकित्सा महाविद्यालयों में मृतदेह की भारी कमी है, जहां दस छात्रों के बीच एक देह होनी चाहिए। जबकि एक देह पर सौ छात्र काम कर रहे हैं। मौजूदा समय में सबसे अधिक देहदान कानपुर में होते हैं, लेकिन कानपुर मेडिकल कॉलेज की शव भंडारण क्षमता कुल 24 शव रखने की है।
एनाटॉमी हेड डॉ. अलका सिंह ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में रघुवर दयाल मिश्रा के पार्थिव देह को विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। बताया कि देह को दो साल से भी ज्यादा सुरक्षित रखा जा सकता है।