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प्रख्यात कथावाचक मोरारी बापू ने रामकथा का लिया संकल्प

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अयोध्या। श्रीअवध धाम में भव्य मंदिर निर्माण की पूर्णता देखने को आंखें तरस रही हैं। श्रीराम मंदिर पूरी दुनिया के लिए दिव्य-भव्य तो है ही, सेव्य भी है। राममंदिर का निर्माण पूरे विश्व के मंगल का सगुन है। विश्व का मंगल होने वाला है। राममंदिर के लिए सभी को बधाई देता हूं। राम की कथा, राम की लीला, राम का नाम, राम का धाम, राम महामंत्र की तरह ही विश्व के लिए राममंदिर भी जरूरी है। अब श्रीराम के मंदिर में कथा कहने का संकल्प है।
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उक्त भावपूर्ण वाणी है प्रख्यात कथावाचक संत मोरारी बापू की। वे विश्व हिंदू परिषद के मुख्यालय कारसेवकपुरम में मानस अयोध्या कांड विषयक नौ दिवसीय कथा यात्रा का शुभारंभ कर रहे थे। उन्होंने राममंदिर निर्माण शुरू होने की पूरे दुनिया को बधाई देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जो राममंदिर बन रहा है, यह घटना इसलिए घटित हुई है कि इतिहास और आध्यात्म के सत्य को दुनिया कबूल करे।
उन्होंने कहा कि समस्या पुरातन होती है लेकिन उसका समाधान देश-काल के संदर्भ में ही देना पड़ता है। कहा कि स्पर्धा में नहीं लेकिन हम श्रद्धा में जरूर आगे हैं। श्रद्धा नहीं तो धर्मारंभ नहीं हो सकता। श्रद्धा से ही ज्ञान की उपलब्धि है। अब बस जल्द ही भव्य गर्भगृह में रामलला के दर्शन की इच्छा है। उन्होंने कहा कि अयोध्या जी में लिया गया मनोरथ अवश्य पूरा होता है। मानस का पूर्व पक्ष सत्य है, प्रेम मध्य पक्ष है और करुणा उत्तर पक्ष है। यही गोस्वामी जी की मानस प्रस्थानत्रयी है।
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इससे पूर्व कथा यात्रा के पहले दिन का शुभारंभ वैदिक ऋचाओं के गायन से हुआ तो समापन हनुमान जी की वंदना से किया। कथा महोत्सव में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, रामलला के मुख्य अर्चक सत्येंद्र दास, संत सतुआ बाबा, महंत सुरेश दास, महंत मैथिलीरमण शरण, अधिकारी राजकुमार दास, महंत शशिकांत दास, महंत मनीष दास व संत मिथिला बिहारी दास सहित बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित रहे।
मोरारी बापू ने कथा यात्रा के शुभारंभ से पूर्व शनिवार सुबह से ही विभिन्न मठ-मंदिरों की यात्रा की। उन्होंने साधु-संतों के बीच में करीब तीन घंटे बिताए। बापू ने कोशलेस सदन जाकर ज.गु. वासुदेवाचार्य का दर्शन किया तो दशरथ महल भी गए। बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य से आशीर्वाद लिया। हरिधाम पीठ में ज.गु. श्रीरामदिनेशाचार्य से सत्संग किया। इसी क्रम में उन्होंने दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास से भी मुलाकात की।
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