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एयरपोर्ट के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर मंथन शुरू

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एयरपोर्ट के लिए भूमि अधिग्रहण की कवायद शुरू
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फैजाबाद। प्रस्तावित सिविल एयरपोर्ट में हवाई पट्टी से सटे तीन गांवों की 100 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि शामिल होगी। इसका सर्वेक्षण तीन साल पहले ही कराया जा चुका है।

सर्वे के समय इस अतिरिक्त जमीन पर लगभग 366 करोड़ रुपये खर्च होने का आकलन किया गया था, लेकिन इसमें इन जमीनों पर स्थित परिसंपत्तियों के मूल्य को शामिल नहीं किया गया था।
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नागरिक उड्डयन विभाग लखनऊ के निदेशक की ओर से एयरपोर्ट की जमीन के अधिग्रहण या क्रय संबंधी पत्र के बाद इस पर फिर कवायद शुरू हो गई है।

लगभग चार साल पहले चार जुलाई 2014 को जिला प्रशासन ने फैजाबाद हवाई पट्टी को एयरपोर्ट अथारिटी ऑफ इंडिया को सौंपा था। इसके बाद इसके विस्तार को लेकर कार्रवाई शुरू हुई तो प्रदेश सरकार ने अतिरिक्त जमीन की व्यवस्था के लिए 60 करोड़ रुपये का आवंटन भी किया।

वर्ष 2015 में तत्कालीन अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व जय शंकर दूबे की अध्यक्षता में बनाई गई समिति ने जमीन चिह्नित की और किसानों से बातचीत करके जमीन को लिए जाने की कार्रवाई शुरू की गई थी।

जमीन के मालिकों से कई चक्रों की बातचीत भी हो गई थी लेकिन इसी दौरान इस पर विराम लग गया था। समिति ने उस समय प्रस्तावित सिविल एयरपोर्ट के लिए तीन गांवों की 100.131 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की थी।

यह जमीन हवाई पट्टी की कब्जे वाली लगभग 177 हेक्टेयर भूमि से अतिरिक्त थी। इनमें गांव जनौरा बाहर की 72.921 हेक्टेयर, गंजा की 4.301 हेक्टेयर और धर्मपुर सहादत की 22.909 हेक्टेयर भूमि है।

तहसील सदर की टीम ने उस समय भूमि पर 365.66 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का आकलन किया गया था। यह आकलन तत्समय प्रचलित डीएम सर्किल रेट के आधार पर किए जाने की बात बताई गई है।

हालांकि इस आंकलन में इन जमीनों पर स्थित परिसंपत्तियों पेड़, नलकूप या कोई मकान आदि का मूल्य शामिल नहीं था। लेकिन इसके बाद प्रदेश सरकार ने इसे स्थगित कर दिया और भेजे गए 60 करोड़ रुपये वापस मंगवा लिए थे।

अब नागरिक उड्डयन विभाग लखनऊ से अतिरिक्त जमीन अधिग्रहण संबंधी पत्र के बाद इस पर यहां मंथन शुरू हो गया है। हलांकि इन तीन वर्षो में डीएम सर्किल रेट में बदलाव आ गया है।

इससे इस जमीन के मूल्य में भी उसी हिसाब से परिवर्तन की संभावना है। रिपोर्ट को लेकर इसी पर मंथन किया जा रहा है। भूमि अध्याप्ति अधिकारी एबी सिंह ने बताया कि वर्ष 2015 में प्रस्तावित सिविल एयरपोर्ट के लिए अतिरिक्त भूमि चिह्नित कराई गई थी।
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इस पर उस समय के सर्किल रेट के हिसाब से खर्च का आकलन भी किया गया था लेकिन उसमें परिसंपत्तियों के मूल्य का आकलन नहीं किया गया था। अब नए सिरे से सारी कवायद की जा रही है।
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