अयोध्या। रामनगरी की सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी मंदिर में बुधवार को प्रसाद चढ़ाने को लेकर विवाद हो गया। जिसके बाद मंदिर का मुख्य द्वार सुबह 9 बजे से लेकर 10:30 बजे तक बंद कर दिया गया।
हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन ने कोरोना के चलते अब तक बंद चल रही प्रसाद चढ़ाने की व्यवस्था बुधवार से शुरू करने को कहा तो पुजारियों ने घटिया क्वालिटी का प्रसाद हनुमान जी को चढ़ाने की बात कर प्रसाद स्वीकार करने से इंकार कर दिया।
यही नहीं नागा साधुओं ने कई दुकानदारों की दुकान से लड्डू भी जबरन सड़क पर फेंक दिया। जिसके बाद व्यापारी आक्रोशित हो गए, इस बीच सूचना पर पहुंची पुलिस ने मान-मनौव्वल कर व्यवस्था सुचारु कराई।
विवाद की शुरुआत बुधवार को तब हुई जब हनुमानगढ़ी के मुख्य महंत गद्दीनशीन प्रेमदास ने प्रसाद चढ़ाए जाने के इजाजत दी। कोरोना संकट को देखते हुए रामनगरी के जिन मंदिरों में प्रसाद चढ़ाए जाने पर 21 अप्रैल से पाबंदी लगाई गई थी उनमें से हनुमानगढ़ी भी एक था।
हनुमानगढ़ी के मुख्य महंत ने प्रशासन के प्रतिनिधियों से सहमति के बाद बुधवार को प्रसाद चढ़ा जाने की अनुमति दी। इस अनुमति के अनुरूप हनुमानगढ़ी में प्रसाद के रूप में जो लड्डू ले जाए गए उनकी क्वालिटी घटिया होने की शिकायत पर पुजारियों ने हनुमान जी के लिए यह प्रसाद स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
इसके बाद हनुमानगढ़ी से बाहर आए साधुओं के जत्थे ने व्यापारियों से यह लड्डू न बेचने और उसे फेंक देने का आह्वान किया। प्रसाद विक्रेताओं ने हीलाहवाली की तो आक्रोशित नागा साधुओं ने कुछ दुकानों से लड्डू बाहर निकाल कर सड़क पर फेंक दिए।
हंगामे की सूचना पर जिलाधिकारी अनुज कुमार झा, एसएसपी शैलेश पांडेय, एसपीसिटी विजयपाल सिंह, सीओ अयोध्या राजेश राय सहित अन्य पुलिस बल मौके पर पहुंचा और आक्रोशित व्यापारियों के साथ-साथ गद्दीनशीन महंत व पुजारियों के बीच मध्यस्थता कराकर मामले को शांत कराया।
इस गतिरोध के बीच सुबह 9 बजे से बंद हुआ हनुमानगढ़ी का मुख्य द्वार 10: 30 बजे तो खुल गया किंतु हनुमानगढ़ी के इर्द-गिर्द प्रसाद की दुकानों के शटर गिर गए। व्यापारियों ने इसे साधुओं की तानाशाही करार दी और नारेबाजी करते हुए प्रसाद फेंकने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।
उधर प्रसाद चढ़ाने को लेकर उपजे विवाद के बीच करीब डेढ़ घंटे तक मंदिर बंद होने के कारण जो भक्त दर्शन-पूजन नहीं कर सके वह निराश दिखे। बहुत सारे भक्त तो विवाद होने के कारण मंदिर की चौखट पर ही माथा टेककर वापस लौट गए।
लेकिन बड़ी संख्या में भक्त करीब डेढ़ घंटे तक दर्शन के इंतजार में भीषण गर्मी में बेहाल होते रहे। मंदिर दोबारा खुलने पर दर्शन-पूजन किया। इस पूरे मामले को लेकर आक्रोशित दुकानदारों ने थानाध्यक्ष रामजन्मभूमि को तहरीर भी दी है।
इसके अलावा न सिर्फ हनुमानगढ़ी बल्कि पूरे अयोध्या क्षेत्र की दुकानें बंद कराकर जुलूस निकालकर व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। व्यापारी नेता नंदकुमार गुप्ता, नंदलाल गुप्ता, विकास गुप्ता, मनीष कुमार, गौरव गुप्ता, संतोष गुप्ता, आनंद सहित आदि ने पूरे मामले का विरोध किया।
तहरीर में महंत गौरीदास पर लड्डू फेंकने का आरोप लगाया गया है। पूर्व चेयरमैन राधेश्याम गुप्ता ने नागा साधुओं पर प्रसाद फेंकने व अभद्रता करने का आरोप लिया।
कहा कि यदि खराब गुणवत्ता का लड्डू दुकानदारों द्वारों बेचा जा रहा है तो प्रशासन द्वारा इसकी जांच कराई जानी चाहिए। नागा साधुओं को ये अधिकार किसने दे दिया, यह अराजकता है।
निर्वाणी अनी अखाड़ा के महासचिव गौरीशंकर दास ने कहा कि नागा साधुओं द्वारा लड्डू फेंकने की बात अफवाह है। हनुमानगढ़ी में अच्छी क्वालिटी का प्रसाद चढ़ाया जाना चाहिए, यदि ऐसा नहीं होता है तो इसका विरोध होना ही चाहिए।
कहा कि कुछ व्यापारी नेता बन रहे हैं जो चौड़ीकरण को लेकर पूरे मामले को तिल का ताड़ बनाने में जुटे हैं। पूरे मामले को राजनीतिक रूप देने का प्रयास है। जो खराब लड्डू बेंच रहे हैं उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
हनुमानगढ़ी से जुड़े संत मनिराम दास पहलवान का कहना है कि निश्चित रूप से हनुमान जी को प्रसाद के रूप में जो लड्डू बेचा गया वह बहुत खराब गुणवत्ता वाला था और इसे नहीं बर्दाश्त किया जा सकता।
हनुमानगढ़ी के निकट पड़ा लड्डू- फोटो : FAIZABAD
हंगामे के बाद मौके पर पहुंचे एसपी सिटी,सीओ अयोध्या व अन्य- फोटो : FAIZABAD
तालाबंदी के बाद बिना दर्शन के वापस लौटते भक्तगण- फोटो : FAIZABAD
हंगामे के बाद व्यापारियों द्वारा बंद की गई प्रसाद की दुकानें- फोटो : FAIZABAD