अयोध्या। राममंदिर निर्माण समिति की दो दिवसीय बैठक शनिवार को समाप्त हो गई। मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र की अध्यक्षता में हुई बैठक में मंदिर निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। ट्रस्ट ने दिसंबर 2023 तक भव्य गर्भगृह में भक्तों को रामलला का दर्शन प्राप्त हो सके, इसका लक्ष्य तय करते हुए काम की गति बढ़ाने का फैसला किया है।
तय किया गया है कि मंदिर में लगने वाले पत्थर, परकोटा व रिटेनिंग वॉल का निर्माण कार्य अब एक साथ किया जाएगा। साथ ही रामजन्मभूमि परिसर में भक्तों के लिए सुविधाएं विकसित करने को लेकर भी नृपेंद्र मिश्र ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों व इंजीनियरों के साथ मंथन किया है।
पत्रकारों से वार्ता करते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि बैठक में दिसंबर 2023 तक भव्य गर्भगृह में भक्तों को रामलला का दर्शन प्राप्त हो, ऐसी योजना बनी है। अभी नींव का काम चल रहा है। 15 सितंबर तक नींव भराई का काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद राफ्ट का निर्माण होगा फिर अक्तूबर के अंत या फिर नवंबर की शुरुआत से राममंदिर की प्लिंथ का निर्माण प्रारंभ कर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि 16 फीट ऊंचे प्लिंथ पर ही राममंदिर का गर्भगृह आकार लेगा। प्लिंथ का काम पूरा होते ही तत्काल राममंदिर के पत्थर लगाने के साथ-साथ परकोटा व रिटेनिंग वॉल का काम भी समानांतर चलेगा। बताया कि प्लिंथ में ग्रेनाइट व मिर्जापुर के कुल चार लाख घनफीट पत्थरों का प्रयोग किया जाएगा।
चंपत राय ने कहा कि बैठक में रामजन्मभूमि परिसर में भक्तों के लिए जनसुविधाएं विकसित करने पर भी मंथन हुआ है। अनुमान है कि राममंदिर बनने के बाद प्रतिदिन एक लाख श्रद्धालु आएंगे। एक लाख में एक व्यक्ति कितनी देर दर्शन करेगा ऐसी गणित पर चर्चा हुई।
देश के प्रसिद्ध मंदिर तिरुपति तिरुमला देवस्थानम में कैसे दर्शन होते हैं, इसका बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है ताकि रामभक्तों के लिए परिसर में बेहतर सुविधाएं विकसित की जा सकें। बैठक में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र, ट्रस्टी बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र सहित ट्रस्ट के इंजीनियर व एलएंडटी व टाटा के इंजीनियर मौजूद रहे।
रामजन्मभूमि परिसर इकोफ्रेंडली हो, इसे लेकर भी बैठक में गहन मंथन किया गया है। महासचिव चंपत राय ने बताया कि परिसर में पर्यावरण के राष्ट्रीय मानकों पर भी विचार किया गया है। पूरा परिसर इको फ्रेंडली हो, ऐसी योजना पर काम चल रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि परिसर में एक साथ पांच लाख लोग आ जाएं तो उन्हें कोई दिक्कत न हो, इसलिए पर्यावरण के राष्ट्रीय मानकों के अनुसार अन्य प्रकल्पों के निर्माण को लेकर चर्चा हुई।
ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने रामजन्मभूमि मार्ग को पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के नाम पर ‘कल्याण पथ’ घोषित किए जाने पर प्रसन्नता जताई है। महासचिव चंपत राय ने कहा कि सरकार का यह निर्णय सराहनीय है।
रामजन्मभूमि क्रॉसिंग-3 मार्ग से जो मालवाहक वाहन जाते हैं, उस मार्ग को भी कल्याण सिंह ने ही बनवाया था। ऐसे में सरकार ने रामजन्मभूमि मार्ग को कल्याण सिंह का नाम देकर प्रशंसनीय कार्य किया है।