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नहाय-खाय के साथ छठ महापर्व शुरू, घाटों पर सजी वेदियां

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अयोध्या। भगवान सूर्यनारायण की उपासना का महापर्व छठ उत्सव सोमवार को नहाए-खाए के साथ शुरू हो गया है। व्रत का समापन शुक्ल पक्ष की सप्तमी 10 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर होगा। छठ पूजा को लेकर शहर के विभिन्न घाटों पर वेदियां सज गई हैं। बाजार गुलजार हैं। इस बार छठ पर महंगाई की मार है, फल व सब्जियों के दाम बढ़ने से व्रती महिलाओं को दिक्कतें हो रही हैं।
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सुहागिनों ने सोमवार को नहाए-खाए के साथ व्रत शुरू कर दिया। मंगलवार को छोटी खरना मनाई जाएगी। बुधवार को महिलाएं निर्जला व्रत रखकर और कमर भर तक पानी में खड़े होकर डूबते सूरज को अर्घ्य देकर पुत्र प्राप्ति और पति की दीर्घायु को मंगलकामना करेंगी। महिलाएं पवित्र नदियों व सरोवरों में खड़ी होकर गुरुवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करेंगी।
अयोध्या के सरयू तट व गुप्तारघाट पर महिलाएं छठ का पूजन करती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी छठ पर्व को लेकर उल्लास छलकने लगा है। घर-घर बेदियां सजाकर पूजन-अर्चन शुरू कर दिया गया है। गोसाईगंज में व्रतियों ने ठकुराइन पोखरा, महादेवा घाट, सीताराम सत्संग घाट व शृंगी ऋषि आश्रम के सरयू नदी पर वेदी बनाकर जगह पक्की कर ली है।
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क्षेत्र की बाजारों में सोमवार को दिन भर खरीदारी को लेकर भीड़ रही। महिलाओं ने कोसी, पीतल का सूप, बांस का सूप, दउरा, डगरा, गन्ना, नारियल सहित पूजा के हर छोटे-छोटे सामान की खरीदारी की। कपड़े की दुकानों पर साड़ियों की खरीदारी भी खूब हुई। शृंगार की दुकानों पर भी महिलाओं की भीड़ रही।
बिहार के निवासी त्रिभुवन वैद्य, प्रहलाद सोनी, रामविलास सोनी, शिव शंकर सोनी, दीपक सोनी, संतोष जायसवाल आदि ने बताया कि ठकुराइन पोखरा घाट पर छठ पूजन की परंपरा की नींव उनके ही परिजनों से शुरू की थी। दूसरे दिन कार्तिक शुक्ल पंचमी को व्रती महिलाएं दिनभर का उपवास रखने के बाद शाम को भोजन करती हैं। इसे खरना कहा जाता है।
प्रसाद के रूप में गन्ने के रस से बने हुए चावल की खीर के साथ दूध, चावल का पिट्ठा और घी चुपड़ी रोटी बनाई जाती है। कार्तिक शुक्ल षष्ठी को दिन में छठ प्रसाद बनाया जाता है। इसे ठेकुवा या टिकरी भी कहते हैं। इसके अलावा चढ़ावा के रूप में लाया गया सांचा और फल भी छठ प्रसाद के रूप में शामिल होता है।
हौसिला नगर निवासी रामदुलारी पाल 30 वर्षों से व्रत रख रही हैं। बताती हैं कि वह कई वर्षों से छठ पूजा का अनुष्ठान कर रही हैं। मां की पूजा का आशीर्वाद ही है कि हमारी गृहस्थी खुशहाल है। मां की कृपा से सुख व शांति है। छठ पूूजा का हर विधि विधान पूरे नियम एवं परंपरा पूर्वक निभाती हूं, जिसका परिणाम है कि मां का आशीर्वाद मिल रहा है।
गांधीनगर जनौरा निवासी रत्ना जायसवाल 20 वर्षों से व्रत रख रही हैं। वह कहती हैं कि छठ मइया की अपार कृपा मिल रही है। व्रत कठिन जरूर है लेकिन छठ मइया की कृपा से सब आसान हो जाता है। घर के सदस्य छठ पूजा की परंपरा निर्वहन में पूरा सहयोग करते हैं। व्रत को लेकर खासा उत्साहित हूं।
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पेट्रोल-डीजल के दाम घटे, फिर भी महंगाई
फल के दाम पहले अब
सेब 110 130 रुपये किलो
केला 40 50 रुपये दर्जन
अंगूर 350 400 रुपये किलो
अनार 110 120 रुपये किलो
पपीता 55 60 रुपये किलो
संतरा 50 60 रुपये किलो
सब्जी के दाम पहले अब
आलू 30 50 रुपये किलो
प्याज 35 40 रुपये किलो
टमाटर 60 80 रुपये किलो
बैगन 50 60 रुपये किलो
भिंडी 35 40 रुपये किलो
परवल 80 100 रुपये किलो
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