मंदिर निर्माण के साथ ही अयोध्या और अयोध्यावासियों की परीक्षा भी खत्म हो जाएगी जो हर वर्ष हर पर्व और त्योहार के साथ हर 6 दिसंबर को देनी पड़ती थी। इस तारीख के आसपास दिखने वाली सहमी अयोध्या की तस्वीरें भी अब बीती बात हो जाएगी। भक्तों को अपने आराध्य तक जाने की राह में बाधाएं तो हटेंगी ही, सुरक्षा बलों की अनावश्यक टोकाटाकी से भी मुक्ति की राह खुल जाएगी।
अयोध्या की छावनी वाली छवि भी बदल जाएगी। राममंदिर निर्माण के साथ हनुमान मंदिर, सीतारसोई, रामखजाना, कैकेयी भवन, कोपभवन, रंगमहल, दशरथ भवन और कनकभवन जैसे कई ऐतिहासिक स्थानों की वीरानगी टूटने का इंतजार भी खत्म हो जाएगा।
इन नदियों का पवित्र जल
गंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, सिंधु, ब्रह्मपुत्र, सतलुज, रावी, चिनाब व व्यास समेत अन्य नदियां। रामभक्तों ने देश के प्रसिद्ध पवित्र कुण्डों का जल भी अयोध्या भेजा है।
इन स्थानों की आई मिट्टी
हल्दीघाटी, चित्तौड़ दुर्ग, स्वर्ण मंदिर के कुण्ड का जल व मिट्टी, वैष्णो देवी, मैसेकर घाट, सभी ज्योतिर्लिंगों के प्रांगण की मिट्टी, सरस्वती उद्गम स्थल का जल व रज, रविदास मंदिर काशी, बाबा साहेब आंबेडकर की इच्छा भूमि व संघ की उद्गम स्थली नागपुर की रज व पवित्र जल, मानसरोवर की पवित्र रज व जल।
पहली बार कोई प्रधानमंत्री आएंगे जन्मस्थान पर
बीते 5 दशक में इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी बतौर प्रधानमंत्री अयोध्या जरूर आए, लेकिन जन्मस्थान से दूरी रखी। इंदिरा गांधी तीन बार, राजीव दो बार और अटल एक बार रामनगरी पहुंचे। यह पहली बार है जब कोई प्रधानमंत्री जन्मस्थान पर पहुंचेंगे।
सीएम योगी की अपील, लोग घर में रहकर दीपक जलाएं
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि भूमिपूजन/शिलान्यास, न केवल मंदिर का है, वरन एक नए युग का भी है। प्रभु श्रीराम का जीवन संयम की शिक्षा देता है। हमें भी संयम रखते हुए वर्तमान परिस्थितियों के दृष्टिगत शारीरिक दूरी बनाए रखना है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे घर में ही भूमिपूजन व शिलान्यास के कार्यक्रम को लाइव देखें। घरों में दीपक जलाएं। पूज्य संत एवं धर्माचार्यगण देवमंदिरों में अखंड रामायण का पाठ करें एवं दीप जलाएं।
एक साथ 50 हजार लोग कर सकते हैं पूजा
- क्षेत्रफल : 84,600 वर्गफुट, पहले 37,590 वर्ग फुट था
- लंबाई : 360 फुट, पहले 268 फुट 5 इंच
- चौड़ाई : 235 फुट, पहले 140 फुट थी
- ऊंचाई : 161 फुट, पहले 128 फुट
- 50 हजार से अधिक भक्त एक साथ कर सकते हैं पूजा, पहले 20 हजार थी क्षमता
- पहले अग्रभाग, सिंहद्वार, नृत्यमंडप, रंगमंडप के बाद गर्भगृह था। अब गर्भगृह और रंगमंडप के बीच गूढ़ मंडप बनेगा। इसके दाएं-बाएं कीर्तन व प्रार्थना मंडप होगा।
- मंदिर निर्माण के लिए देश से लगभग 1500 पवित्र एवं ऐतिहासिक स्थलों की मिट्टी तथा 100 से अधिक पवित्र नदियों एवं सैकड़ों कुण्डों का जल आ चुका है
मंदिर निर्माण की शुभ घड़ी संभवत: दुनिया भर में अयोध्या का नाम ऐसे महत्वपूर्ण स्थान के रूप में दर्ज कराएगी, जो हिंदुओं के अपने आराध्य के स्थान की वापसी के लिए 492 वर्षों के संघर्ष का संकटपूर्ण इतिहास समेटे होगा। इस दौरान किसी ने पुत्र खोया तो किसी ने पति, किसी ने पत्नी, पुत्री और किसी ने माता, पिता और भाई। कभी सरकार आड़े आई तो कभी कानूनी प्रक्रिया। मुकदमों पर मुकदमे हुए। एक समाप्त हुआ तो दूसरा शुरू हो गया।
ताला खुला तो शिलान्यास में बाधा आ खड़ी हुई। शिलान्यास हुआ तो निर्माण की राह में अवरोध खड़े कर दिए गए। एक न्यायालय से जीते तो दूसरे में इस स्थान को रामलला की जन्मभूमि साबित करने की चुनौती आ खड़ी हुई। ऐसे अवसर भी आए कि लोगों ने सिर्फ और सिर्फ न्यायालय की बात मानने की घोषणा की, लेकिन जिला या उच्च न्यायालय ने फैसला दिया तो उसे मानने से मुकर गए। सुलह-समझौते के रास्ते भी तलाशे गए।
अंतहीन वार्ताओं का सिलसिला चला। एक वार्ता चली और टूटी तो दूसरी की संभावनाएं तलाशी जाने लगीं। धर्मगुरु भी समझौते की राह तलाशते दिखे। न्यायालय ने भी सुलह-समझौते का रास्ता दिखाया और फोरम भी बनाया, लेकिन अंतत: परिणाम न्यायालय से ही आया। इस सबके बावजूद एक पीढ़ी के संकल्प को दूसरी पीढ़ी ने जिस तरह न सिर्फ जिम्मेदारी से संभाला, बल्कि खूबसूरती के साथ अपनी भावी पीढ़ी को सौंपकर पूर्णता तक पहुंचा दिया।