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492 साल बाद प्रतीक्षा खत्म... पीएम मोदी चांदी की ईंट रखकर करेंगे निर्माण का शुभारंभ

Wed, 05 Aug 2020 04:36 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या

सार

  • शुभ घड़ी... आज दोपहर 12 बजकर 15 मिनट 15 सेकंड
  • प्रतीक्षा समाप्त... 492 वर्ष के इंतजार के बाद अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का भूमिपूजन
  • श्रीगणेश... प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चांदी की ईंट रखकर मंदिर निर्माण का करेंगे शुभारंभ
  • अभिजीत मुहूर्त... भगवान श्रीराम ने जिस अभिजीत मुहूर्त में लिया था जन्म, भूमिपूजन उसी मुहूर्त में
  • 32 सेकंड का शुभ मुहूर्त
  • 12 बजकर 15 मिनट 15 सेकंड से 12 बजकर 15 मिनट 47 सेकंड तक
  • 5 नक्षत्रों की परिचायक 5 चांदी की शिलाओं समेत कुल 9 शिलाएं रखेंगे पीएम
  • राज्यपाल आनंदी बेन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, संघ प्रमुख भागवत समेत कई विशिष्ट हस्तियां बनेंगी साक्षी
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राम मंदिर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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492 वर्ष बाद अंतत: शुभ घड़ी आ ही गई। अयोध्या में भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण की 5 सदी से चली आ रही प्रतीक्षा समाप्त होने का एतिहासिक पल आ गया है। बुधवार को शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 15 मिनट 15 सेकंड पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों श्रीराम जन्मभूमि स्थल पर मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन के साथ ही औपचारिक रूप से मंदिर निर्माण के कार्य का शुभारंभ हो जाएगा। प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी पीएम के कार्यक्रम की पुष्टि कर दी है।

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इसके साथ ही करोड़ों रामभक्तों की प्रतीक्षा के साथ ही उनके सारे संशय और असमंजस भी समाप्त हो जाएंगे। उन हजारों दिवंगत आत्माओं को शांति मिल जाएगी, जो इस स्थान पर भव्य राममंदिर निर्माण के संकल्प और सपने के साकार होने की प्रतीक्षा करते-करते संसार से चले गए। अब लोगों को इंतजार रहेगा तो सिर्फ उस घड़ी का कि मंदिर निर्माण पूर्ण होने के बाद रामलला अपने मूल स्थान पर कब विराजेंगे। 

पर, यह इंतजार पहले जैसा नहीं होगा। मंदिर निर्माण की शुरुआत सिर्फ रामभक्तों की ही नहीं, उन शिलाओं और पत्थरों की भी प्रतीक्षा समाप्त करेगी जो कई दशकों से राममंदिर में अपने ठौर की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनेंगी राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, संघ प्रमुख मोहन भागवत, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास समेत तमाम हस्तियां। भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी करीब तीन घंटे तक रामनगरी में रहेंगे।

तीन घंटे रहेंगे पीएम

  • 9:35 बजे दिल्ली से विशेष विमान से होंगे रवाना।
  • 10:35 बजे लखनऊ एयरपोर्ट पर लैंडिंग।
  • 10:40 बजे हेलिकॉप्टर से अयोध्या के लिए प्रस्थान।
  • 11:30 बजे अयोध्या साकेत कॉलेज के हेलिपैड पर लैंडिंग।
  • 11:40 बजे हनुमान गढ़ी पहुंचकर 10 मिनट दर्शन-पूजन।
  • 12 बजे राम जन्मभूमि परिसर पहुंचेंगे। 10 मिनट में रामलला विराजमान का दर्शन-पूजन। रामलला परिसर में पारिजात का पौधारोपण। भूमिपूजन, राम मंदिर की आधारशिला की स्थापना।
  • 1.10 बजे महंत नृत्यगोपाल दास सहित ट्रस्ट कमेटी से करेंगे भेंट।
  • 2:05 बजे साकेत कॉलेज हेलिपैड के लिए प्रस्थान।
  • 2:20 बजे लखनऊ के लिए उड़ेगा हेलिकॉप्टर।
     

अब सहमी नहीं दिखेगी अयोध्या

अयोध्या - फोटो : अमर उजाला
मंदिर निर्माण के साथ ही अयोध्या और अयोध्यावासियों की परीक्षा भी खत्म हो जाएगी जो हर वर्ष हर पर्व और त्योहार के साथ हर 6 दिसंबर को देनी पड़ती थी। इस तारीख के आसपास दिखने वाली सहमी अयोध्या की तस्वीरें भी अब बीती बात हो जाएगी। भक्तों को अपने आराध्य तक जाने की राह में बाधाएं तो हटेंगी ही, सुरक्षा बलों की अनावश्यक टोकाटाकी से भी मुक्ति की राह खुल जाएगी।

अयोध्या की छावनी वाली छवि भी बदल जाएगी। राममंदिर निर्माण के साथ हनुमान मंदिर, सीतारसोई, रामखजाना, कैकेयी भवन, कोपभवन, रंगमहल, दशरथ भवन और कनकभवन जैसे कई ऐतिहासिक स्थानों की वीरानगी टूटने का इंतजार भी खत्म हो जाएगा।

इन नदियों का पवित्र जल
गंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, सिंधु, ब्रह्मपुत्र, सतलुज, रावी, चिनाब व व्यास समेत अन्य नदियां। रामभक्तों ने देश के प्रसिद्ध पवित्र कुण्डों का जल भी अयोध्या भेजा है।

इन स्थानों की आई मिट्टी
हल्दीघाटी, चित्तौड़ दुर्ग, स्वर्ण मंदिर के कुण्ड का जल व मिट्टी, वैष्णो देवी, मैसेकर घाट, सभी ज्योतिर्लिंगों के प्रांगण की मिट्टी, सरस्वती उद्गम स्थल का जल व रज, रविदास मंदिर काशी, बाबा साहेब आंबेडकर की इच्छा भूमि व संघ की उद्गम स्थली नागपुर की रज व पवित्र जल, मानसरोवर की पवित्र रज व जल।

पहली बार कोई प्रधानमंत्री आएंगे जन्मस्थान पर
बीते 5 दशक में इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी बतौर प्रधानमंत्री अयोध्या जरूर आए, लेकिन जन्मस्थान से दूरी रखी। इंदिरा गांधी तीन बार, राजीव दो बार और अटल एक बार रामनगरी पहुंचे। यह पहली बार है जब कोई प्रधानमंत्री जन्मस्थान पर पहुंचेंगे।

सीएम योगी की अपील, लोग घर में रहकर दीपक जलाएं
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि भूमिपूजन/शिलान्यास, न केवल मंदिर का है, वरन एक नए युग का भी है। प्रभु श्रीराम का जीवन संयम की शिक्षा देता है। हमें भी संयम रखते हुए वर्तमान परिस्थितियों के दृष्टिगत शारीरिक दूरी बनाए रखना है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे घर में ही भूमिपूजन व शिलान्यास के कार्यक्रम को लाइव देखें। घरों में दीपक जलाएं। पूज्य संत एवं धर्माचार्यगण देवमंदिरों में अखंड रामायण का पाठ करें एवं दीप जलाएं।

एक साथ 50 हजार लोग कर सकते हैं पूजा
  • क्षेत्रफल : 84,600 वर्गफुट, पहले 37,590 वर्ग फुट था
  • लंबाई : 360 फुट, पहले 268 फुट 5 इंच
  • चौड़ाई : 235 फुट, पहले 140 फुट थी
  • ऊंचाई : 161 फुट, पहले 128 फुट
  • 50 हजार से अधिक भक्त एक साथ कर सकते हैं पूजा, पहले 20 हजार थी क्षमता
  • पहले अग्रभाग, सिंहद्वार, नृत्यमंडप, रंगमंडप के बाद गर्भगृह था। अब गर्भगृह और रंगमंडप के बीच गूढ़ मंडप बनेगा। इसके दाएं-बाएं कीर्तन व प्रार्थना मंडप होगा।
  • मंदिर निर्माण के लिए देश से लगभग 1500 पवित्र एवं ऐतिहासिक स्थलों की मिट्टी तथा 100 से अधिक पवित्र नदियों एवं सैकड़ों कुण्डों का जल आ चुका है
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हर अवरोध पर भारी पड़ा संकल्प...

अयोध्या - फोटो : amar ujala
मंदिर निर्माण की शुभ घड़ी संभवत: दुनिया भर में अयोध्या का नाम ऐसे महत्वपूर्ण स्थान के रूप में दर्ज कराएगी, जो हिंदुओं के अपने आराध्य के स्थान की वापसी के लिए 492 वर्षों के संघर्ष का संकटपूर्ण इतिहास समेटे होगा। इस दौरान किसी ने पुत्र खोया तो किसी ने पति, किसी ने पत्नी, पुत्री और किसी ने माता, पिता और भाई। कभी सरकार आड़े आई तो कभी कानूनी प्रक्रिया। मुकदमों पर मुकदमे हुए। एक समाप्त हुआ तो दूसरा शुरू हो गया। 

ताला खुला तो शिलान्यास में बाधा आ खड़ी हुई। शिलान्यास हुआ तो निर्माण की राह में अवरोध खड़े कर दिए गए। एक न्यायालय से जीते तो दूसरे में इस स्थान को रामलला की जन्मभूमि साबित करने की चुनौती आ खड़ी हुई। ऐसे अवसर भी आए कि लोगों ने सिर्फ और सिर्फ न्यायालय की बात मानने की घोषणा की, लेकिन जिला या उच्च न्यायालय ने फैसला दिया तो उसे मानने से मुकर गए। सुलह-समझौते के रास्ते भी तलाशे गए। 

अंतहीन वार्ताओं का सिलसिला चला। एक वार्ता चली और टूटी तो दूसरी की संभावनाएं तलाशी जाने लगीं। धर्मगुरु भी समझौते की राह तलाशते दिखे। न्यायालय ने भी सुलह-समझौते का रास्ता दिखाया और फोरम भी बनाया, लेकिन अंतत: परिणाम न्यायालय से ही आया। इस सबके बावजूद एक पीढ़ी के संकल्प को दूसरी पीढ़ी ने जिस तरह न सिर्फ जिम्मेदारी से संभाला, बल्कि खूबसूरती के साथ अपनी भावी पीढ़ी को सौंपकर पूर्णता तक पहुंचा दिया।
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