कुमारगंज (अयोध्या)। महिलाओं, बच्चों और किशोरियों को जागरूक करते-करते राधालक्ष्मी समाज सेविका बन गईं। बच्चों को कैंप तक लाना, किशोरियों को अपने साथ ले जाकर नौकरी के लिए आवेदन कराना, बुजुर्ग महिलाओं को साथ ले जाकर कार्यालयों मेंं काम करवाना, उनकी जीवनचर्या में शामिल हो गया। गांव की किसी महिला, किशोरी को कोई जानकारी चाहिए तो बैंक वाली दीदी हैं न। यह धारणा बन गई।
राधालक्ष्मी मिल्कीपुर गांव की हैं। पढ़ी-लिखी हैं। कुछ साल पहले तक घर के लोगों का पालन पोषण, सेवा उनका काम था। घर की दहलीज से बाहर कदम स्वयं सहायता समूूह में सदस्य, फिर बीसी सखी के रूप में रखा। जीविका के साथ सेवा में ऐसी रमीं कि कुछ दिनों बाद ही महिलाओं, किशोरियों में वह बैंक वाली दीदी के नाम से जानी जाने लगीं। बताती हैं कि जीविका तो जरूरी है। समाज की अहमियत भी है। महिलाओं और किशोरियों में झेप है। पहले तो समूह में शामिल कराने के लिए मेहनत करनी पड़ती थी। जुड़ीं तो लाभ हुआ। परिवार चला तो राहत मिली।
बातचीत करते, दर्द सुनते, अंदर का मन जागा। नाम के अनुरूप काम करने की जज्बा आ गया। कहती हैं कि इसने जीवन को नया आयाम दे दिया। इसमें थोड़ा सुकून मिलता है। बच्चों के लिए स्वास्थ्य कैंप, किशोरियों के स्वास्थ्य सुरक्षा, पोषण और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी काम करने लगीं। बच्चों के स्वास्थ्य के लिए कैंप लगवाने में भूमिका निभाती हैं। किशोरियों की संवेदनात्मक समस्याओं पर चर्चा करके उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं। अब तक आधा दर्जन बुजुर्ग महिलाओं को रुका हुआ किसान सम्मान निधि का पैसा दिलवाया। कई को रोजगार कराया। सरकारी कार्यालयों से लाभ दिलवाया। समस्याएं हल कराईं।
जल मित्र बनवाया, बस कंडक्टर पद पर कराया आवेदन
राधालक्ष्मी किशोरियों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास करती है। अब तक कई किशोरियों को प्रेरित करके जल मित्र बनवाया। बस कंडक्टर पद के लिए तीन किशोरियों को आवेदन कराया। आगे भी ऐसे काम के लिए प्रेरित कर रही हैं।
जी-20 मेंं कर चुकीं प्रतिनिधित्व
पिछले 14 व 15 जून को तमिलनाडु में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए तमिलनाडु सरकार ने राधा लक्ष्मी को आमंत्रित किया था। यह उसमें शामिल हुईं। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की प्रक्रिया को लेकर संबोधित किया। इसकी प्रशंसा हुई।