फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

5.37 करोड़ से पुनर्जीवित हुई 61 किमी लंबी बिसुही नदी

विज्ञापन
विज्ञापन
अयोध्या। पौराणिक तमसा नदी के बाद अयोध्या में दूसरी नदी के जीर्णोद्धार का काम भी पूरा हो गया। जिले में 61 किमी लंबी बिसुही नदी में बारिश का पानी हिलोरे लेने लगा है। महज साढ़े पांच करोड़ रुपये की लागत से बिसुही पुनर्जीवित हो गई।
विज्ञापन

इससे न केवल 2.62 लाख मानव दिवसों का सृजन हुआ बल्कि कई सौ हेक्टेयर खेतों की सिंचाई का मार्ग भी प्रशस्त हुआ। वाटर रिचार्ज होने से आसपास के क्षेत्रों में गर्मी के दिनों में पानी की समस्या से निजात भी मिलने की संभावना है।
व्यवस्था और व्यक्ति के लिए कोई काम मुश्किल नहीं है बशर्ते यह ठान लिया जाए कि इसे पूरा करना ही है। बिसुही नदी का जीर्णोद्धार इसका उदाहरण है। तमसा के बाद बिसुदी अयोध्या की दूसरी ऐसी नदी है जिसका जीर्णोद्धार किया गया। अमूमन बारिश में भी यहां-वहां सूखी रहने वाली झाड़-झंखाड़ से भरी नदी को अब देखकर आश्चर्य होता है कि यह वही बिसुही है जिसमें पानी की बहना मुश्किल से हो पाता था।
विज्ञापन

मनरेगा के तहत डीएम अनुज कुमार झा, पूर्व सीडीओ प्रथमेश कुमार, डीसी मनरेगा नागेंद्र मोहन राम त्रिपाठी ने कई महीने पहले इसकी खुदाई का काम शुरू कराया था। यह नदी जिले में हैरिंग्टनगंज ब्लॉक के सिंधोरा गांव से शुरू होती है। इसके बाद यह बीकापुर ब्लॉक क्षेत्र से होते हुए तारून ब्लॉक के सिरसा नियाजपुर ग्राम पंचायत में जिले में इसका अंतिम छोर है।
इसके बाद जिला अंबेडकरनगर आ जाता है। इस बीच यह नदी 61 किमी का मार्ग तय करती है। यह तीनों ब्लॉकों की 29 ग्राम पंचायतों से होकर निकलती है। मनरेगा के तहत इसके जीर्णोद्धार पर 5.37 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इससे यहां के गरीबों को 262756 दिनों का रोजगार भी मिला। अब इस नदी में बारिश का पानी हिलोरे ले रहा है। देखने वालों का मन प्रसन्न हो जाता है।
खास बात यह भी है कि यह नदी उन ब्लॉकों से होकर गुजरती है जहां भूगर्भ जलस्तर काफी नीचे है। नदी के जीर्णोद्धार और वाटर रिचार्जिंग से इन क्षेत्रों में भूगर्भ जलस्तर में वृद्धि होना तय है। नदी के जीर्णोद्धार से एक नहीं कई लाभ होंगे। इन क्षेत्रों के खेतों की सिंचाई के लिए साल के ज्यादातर समय पानी उपलब्ध होगा। इनके किनारों पर पौधरोपण से प्रदूषण कम होगा।
मनरेगा उपायुक्त नागेंद्र मोहन राम त्रिपाठी ने बताया किअयोध्या की दूसरी महत्वपूर्ण नदी बिसुही के जीर्णोद्धार का काम पूरा हो गया है। इसके जीर्णोद्धार पर 5.37 करोड़ रुपये खर्च हुए। इससे 2.62 लाख मानव दिवसों का सृजन हुआ। जाब कार्डधारकों को इसका लाभ मिला। नदी के जीर्णोद्धार से भूगर्भ जलस्तर में वृद्धि होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें