अयोध्या। संकटमोचन सेना व जीवन अमृत के तत्वावधान में दो दिवसीय आयुर्वेद कुंभ का शनिवार को शुभारंभ हुआ। रामनगरी के योग एवं प्राकृतिक चिकित्सालय में आयोजित आयुर्वेद कुंभ में भारत केे कोने-कोने से करीब 2500 वैद्य एकत्रित हुए हैं।
पहले दिन 2500 वैद्यों ने एक साथ सुश्रुत संहिता का पाठ कर विश्व कीर्तिमान रचा। तीन सत्रों में आयोजित कार्यक्रम में वैद्यों ने व्याख्यान देते हुए लोगों को अधिक से अधिक आयुर्वेद अपनाने के लिए प्रेरित किया। इसके साथ ही आयुर्वेद को घर-घर पहुंचाने का संकल्प भी लिया गया।
इससे पूर्व पहले दिन के सत्र का उद्घाटन संकटमोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय दास, ज.गु. रामदिनेशाचार्य, महंत रामभूषण दास कृपालु सहित अन्य संतों ने दीप जलाकर किया। संजय दास ने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा शास्त्र को पूर्वोत्तर भारत के प्रमुख राज्य उत्तरप्रदेश के समस्त जनमानस तक पहुंचाने का बीड़ा प्रदेश के युवा वैद्यों ने उठाया है। इसकी शुरुआत प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या से हुई है। अब वह दिन दूर नहीं जब प्रदेशवासी भी सुलभ तरीके से आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का लाभ उठा सकेंगे।
इसके बाद दस बजे से सुश्रुत संहिता के पाठ का श्रीगणेश हुआ। दो घंटे में देश के कोने-कोने से आए आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने एक साथ सुश्रुत संहिता का पाठ कर नया कीर्तिमान रचा। योग एवं प्राकृतिक चिकित्सालय परिसर में आयुर्वेदिक औषधियों व पुस्तकों आदि के कुल 40 स्टॉल लगाए गए हैं। इन स्टॉलों पर आयुर्वेद में रुचि रखने वालों की भीड़ दिखी।
कार्यक्रम में प्रो. बनवारी लाल गौड़, वैद्य धर्माधिकारी एवं गजेंद्र सिंह तोमर को लाइफ टाइम अचीवमेंट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। इस दौरान महंत बलरामदास, संकट मोचन सेना के कार्यवाहक अध्यक्ष हेमंत दास, महंत छविरामदास, संत कृष्णकांत दास सहित वैद्य बनवारी लाल गौड़, वैद्य अभिजीत सराफ, वैद्य तपन कुमार, वैद्य नरेंद्र गुजराती, वैद्य प्रवीण, वैद्य अभय नरायण मिश्र सहित दिल्ली, प्रयागराज, लखनऊ सहित विभिन्न जिलों से आए आयुर्वेदिक चिकित्सक मौजूद रहे।
नाड़ी विशेषज्ञ वैद्य तपन कुमार ने व्याख्यान की शृंखला में कहा कि आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति भारत की पहचान है। कोरोना महामारी के दौरान आयुर्वेद ने अपनी उपयोगिता साबित की और मरीजों को न सिर्फ जीवन प्रदान किया बल्कि लोगों का रुझान भी अपनी तरफ मोड़ा।
कहा कि धरा की सभी चिकित्सा पद्धतियां आयुर्वेद में ही समाहित हैं। एलोपैथ, होमियोपैथ और यूनानी चिकित्सा पद्धति का मूल आयुर्वेद में समाहित है। लोगों को अधिक से अधिक आयुर्वेदिक औषधियों का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करना ही हमारा लक्ष्य है।
राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति बनवारी लाल ने कहा कि आयुर्वेद जीवन का विज्ञान है। आयुर्वेदिक पद्धति हजारों वर्षों से हमारे जीवन में रची-बसी हुई है। आयुर्वेद दुनिया की सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धतियों में से एक है।
इस चिकित्सा पद्धति को अब तक व्यापक विस्तार नहीं मिल पाया है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में सरकार के प्रयास से इस चिकित्सा पद्धति का प्रसार उस वर्ग में भी बढ़ने लगा है जो अब तक इसे जुड़ी-बूटी भर समझते रहे। कोरोना काल में आयुर्वेद ने अपनी उपयोगिता साबित भी कर दी है।
आयोजन के संयोजक मंडल में शामिल इंद्रासन प्रजापति ने बताया कि कुंभ के दूसरे दिन रविवार को निशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जाएगा। इसमें देश के लगभग 50 आयुर्वेद विशेषज्ञ जो चिकित्सा के अलग-अलग विधा में पारंगत हैं, अपनी सेवाएं दिन के प्रथम पहर तक देंगे। शिविर सुबह दस बजे से दो बजे तक संचालित होगा। उसके बाद सुश्रुत रथयात्रा एवं भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाएगी।