कुएं के पानी से नहाने के लिए मारामारी
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सरकार ने पानी की बर्बादी रोकने की योजना बनाई है। उपभोक्ता जितना पानी यूज करेंगे, उस हिसाब से उन्हें बिल चुकाना पड़ेगा। इस दिशा में काम शुरू हो चुका है। इस संबंध में जलनिगम की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) को सरकार की मंजूरी मिल चुकी है। धनराशि मिलते ही काम शुरू हो जाएगा। शहर में केंद्र की अमृत योजना के तहत 19.79 करोड़ रुपये से 44,601 घरों में वाटर मीटर लगाए जाएंगे।
तीन दशक पहले घरों में वाटर मीटर लगा करते थे। मेन सप्लाई से जुुड़े इन मीटरों से पानी गुजरता था। जितना पानी गुजरता था, उसी हिसाब से मीटर आगे बढ़ते थे। नगर पालिका कर्मी मीटर रीडिंग लेकर बिल बनाता था। उसके हिसाब से उपभोक्ता को बिल चुकाना पड़ता था। समय के साथ पेयजल कनेक्शन तो बढ़ते गए, लेकिन पानी की उपलब्धता बढ़ाने के जतन नहीं हुए। इससे पेयजल किल्लत बढ़ती गई। लोगों के घरों में पानी का पहुंचना बंद हो गया। लोगों को सड़क किनारे टी लगाकर पानी भरने को मजबूर होना पड़ा। जिससे वाटर मीटर का रोल खत्म हो गया।
अब फिर से वाटर मीटर अस्तित्व में आ रहे हैं। शहर में 123 करोड़ रुपये खर्च करके लोगों को पानी की सुविधा मुहैया कराई जा रही है। इस योजना को वर्ष 2044 की आबादी को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। अब लोगों को जोन वार पानी मिलेगा। जिस तादाद में पानी की टंकियां और ट्यूबवेल स्थापित कराए गए हैं। उससे आने वाले समय में लो प्रेशर की शिकायत नहीं होगी। लोगों को भरपूर पानी मिलने की उम्मीद है। ऐसे में पानी की बर्बादी रोकने के लिए सरकार ने वाटर मीटर लगाने की योजना बनाई है। यह मीटर शहर के हर उस घर में लगाए जाएंगे, जो नगरपालिका रिकार्ड में दर्ज हैं। यह संख्या 44601 है। जलनिगम निर्माण इकाई इस कार्य को कराएगी।