इटावा जिले के जसवंतनगर थाना क्षेत्र में घने कोहरे के चलते रेलवे लाइन पर दो हादसों में सोमवार को तीन लोगों की जान चली गई, जबकि एक घायल हो गया। घायल को जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से परिजन इलाज के लिए आगरा ले गए।
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पुलिस ने तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पहला हादसा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) ट्रैक पर बलरई स्टेशन के पास बिहारीपुर गांव के पास सुबह साढ़े सात बजे मालगाड़ी से कटकर दो युवकों की जान चली गई, जबकि किशोर घायल हो गया।
बिहारीपुर गांव निवासी जगदीश सिंह का बेटा सतीश बाबू (24) और सोवरन सिंह का बेटा राम खिलाड़ी (16) और आगरा के नंदगांव जैतपुर निवासी पप्पू सिंह का बेटा शैलेंद्र सिंह (23) शौच के लिए रेलवे ट्रैक पार कर रहे थे। शैलेंद्र बिहारीपुर निवासी मामा रामरक्षक के घर आया था।
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ट्रैक पार करने के दौरान तीनों को कोहरे की वजह से ट्रेन नहीं दिखी और मालगाड़ी की चपेट में आ गए, जिससे शैलेंद्र और सतीश बाबू की मौत हो गई, जबकि रामखिलाड़ी घायल हो गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायल को जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से परिजन आगरा ले गए।
उधर, दूसरा हादसा सुबह लगभग 8 बजे रेलवे स्टेशन की ईस्ट केबिन के आगे हुआ। नगला घनु निवासी रामस्वरूप का बेटा प्रेम सिंह (45) साइकिल से रेलवे ट्रैक पार कर रहा था। उसी दौरान मेन लाइन पर राजधानी एक्सप्रेस से टकरा गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। प्रेम सिंह के दो बेटियां और एक 10 साल का बेटा है।
घर में शौचालय होता तो बच जाती जान
घर पर शौचालय न होने से दो युवकों की जान चली गई, जबकि एक घायल हो गया। सरकारी नुमाइंदों और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा किसी परिवार को कितनी भारी पड़ सकती है, इसकी बानगी जसवंतनगर में देखने को मिली। परिजन एक शौचालय के लिए प्रधान से गुहार लगाते रहे।
प्रधान के यहां बात नहीं बनी तो ब्लाक के चक्कर लगाए, लेकिन शौचालय की राशि नहीं मिल सकी। मृतक सतीश कुमार, शैलेंद्र और घायल राम खिलाड़ी के घरों में शौचालय नहीं है। सतीश की पत्नी मोहिनी और शैलेंद्र की पत्नी राधा का कहना है कि वे लगातार ब्लॉक के चक्कर लगाते रहे, परंतु उन्हें शौचालय नहीं मिला।
मजबूरन परिवार के लोग शौच के लिए खेतों पर जाते हैं। हालांकि, इटावा जिला पहले से ही ओडीएफ घोषित किया जा चुका है, लेकिन हकीकत ये है कि गांव के अधिकांश लोग खुले में ही शौच जाते हैं। परिजनों ने बताया कि तत्कालीन प्रधान द्वारा उन्हें शौचालय नहीं दिए थे। सतीश मजदूरी कर अपने परिवार का पालन पोषण करता था। उसकी शादी अभी एक साल पहले ही हुई थी, उसकी पत्नी गर्भवती है।