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14 हजार मीट्रिक टन आलू के सड़ने की आशंका

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इटावा। नए आलू की आवक होने के कारण पुराने आलू के दाम औंधे मुंह गिर गए हैं। पुराने आलू के भाव गिरने से किसान आलू निकालने के लिए शीतगृहों में नहीं आ रहे हैं।
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जिले के शीतगृहों में अभी भी 14 हजार मीट्रिक टन आलू रखा है। बिक्री न होने के कारण इस आलू के सड़ने की आशंका पैदा हो गई है। शीतगृह स्वामियों ने किसानों को 15 दिसंबर तक आलू की निकासी करने के नोटिस दिया है।
इस समय नए आलू की आवक शुरू हो गई गई है। बाजार में नया आलू आने के कारण पुराने आलू की मांग कम हो गई। मांग कम होने के कारण पुराने आलू के भाव अचानक काफी गिर गए हैं।
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इस समय बाजार में पुराने आलू के भाव डेढ़ सौ से लेकर दो सौ रुपये प्रति कट्टा चल रहा है। इस रेट पर आलू की बिक्री करने से शीतगृह का भाड़ा ही निकल रहा है। कुछ न मिलने के कारण आलू को लेने के लिए शीतगृहों की ओर नहीं आ रहे हैं।
इस कारण से शीतगृह स्वामी भी परेशान हैं। जिले में कुल 59 शीतगृह है, जिसकी कुल भंडारण क्षमता आठ लाख 75 हजार दो सौ आठ मीट्रिक टन है। जिसमें से सात लाख 16 हजार आठ सौ मीट्रिक टन आलू का भंडारण किया गया था।
अब तक छह लाख 86 हजार मीट्रिक टन आलू की निकासी हो चुकी है। किसानों को यह उम्मीद थी कि आलू के भाव में उछाल आएगा, लेकिन नए आलू की सही आवक होने के कारण पुराने आलू के भाव में अचानक गिरावट का गई, जिससे किसान शीतगृहों में अपना आलू निकालने के लिए नहीं आए।
शीतगृहों में अभी भी 14 हजार मीट्रिक टन आलू शेष बचा है, जिसके सड़ने की आशंका पैदा हो गई है। इस समय पुराने आलू के भाव डेढ़ से लेकर दो सौ रुपये प्रति कट्टा चल रहा है।
जिसमें 115 रुपये शीतगृह का भाडा़ व बारदाने का 35 रुपये किसान को देना पडे़गा। इस भाव में आलू बिकने से किसान को कुछ नहीं मिलेगा, जिस कारण किसान नहीं आ रहे।
शीतगृहों में 14 हजार मीट्रिक टन आलू शेष बचा है। 30 नवंबर तक शीतगृहों को चलाने के लिए कहा गया था, लेकिन किसान अपना आलू निकालने के लिए नहीं आए।
शीतगृह स्वामियों से किसानों को 15 दिसंबर तक आलू निकालने के नोटिस देने के लिए कहा गया है। नए आलू की आवक होने से पुराने आलू के भाव अचानक गिर गए, जिससे किसान आलू को नहीं निकाल रहे।
- एके सिन्हा, उद्यान विभाग
किसानों को आलू निकालने के लिए नोटिस दे दिए गए हैं कि वह 15 दिसंबर तक अपना आलू निकाल लें। उसके बाद आलू को निकालकर बाहर रख दिया जाएगा। नए आलू के भंडारण कि लिए शीतगृह का मेंटीनेंस करवाना पड़ता है, जिसमें डेढ़ से दो माह का समय लगता है।
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-हरीप्रकाश चौधरी, शीतगृह मालिक
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