कथा सुनाते आचार्य रवि नाथ महाराज
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सैफई। गोगा देव राजस्थान के लोक देवता माने जाते हैं। इन्हें जाहरवीर गोग राणा के नाम से भी जाना जाता है। इनके जन्म को लेकर कथा प्रचलित है, जिसका वर्णन गुरुवार को विवेक विहार कॉलोनी फर्रुखाबाद रोड पर चल रही श्री शिव गोरक्ष जाहरवीर कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन कथा प्रवक्ता आचार्य रवि नाथ महाराज ने गोगा जाहरवीर के जन्म की कथा भक्तों को सुनाई।
राष्ट्रीय प्रवक्ता आचार्य रवि नाथ महाराज ने कहा राजस्थान के महापुरुष गोगाजी का जन्म भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। इसे गोगा नवमी के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि गोगाजी की मां बाछल देवी को संतान नहीं हुई थी, वो निसंतान थीं। संतान प्राप्ति के लिए बाछल देवी ने हर तरह के यत्न कर लिए थे, लेकिन उन्हें संतान सुख नहीं मिला।
गुरु गोरखनाथ ‘गोगामेडी’ के टीले पर तपस्या में लीन थे। तभी बाछल देवी उनकी शरण में पहुंच गईं। उन्हें अपनी परेशानी बताईं। तभी गुरु गोरखनाथ ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया। गोरखनाथ ने बाछल देवी को प्रसाद के तौर पर गुगल नमक दिया। यह प्रसाद खाकर बाछल देवी गर्भवती हो गईं।
इसके बाद गोगा देव (जाहरवीर) का जन्म हुआ। गुगल फल के नाम से ही इनका नाम गोगाजी जाहरवीर पड़ गया। देर शाम तक चली कथा में गोगा जाहरवीर के जन्म दिन की कई झांकियां निकाली गई ,अंत में परीक्षित एवं आयोजक योगेंद्र यादव ने आरती की।
कथा सुनते भक्तगण- फोटो : ETAWAH