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तेंदुए का कुनबा बढ़ा

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चकरनगर। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में तेंदुआ ने दो नर बच्चों को जन्म देने से सेंचुअरी अमले में खुशी का माहौल है। संबंधित जंगल में ग्रामीणों का प्रवेश वर्जित कर दिया गया है।
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कई दशक पूर्व चंबल के बीहड़ों से विलायती बबूल की घातक कटीली झाड़ियों बीहड़ में बहुतायत होने से नाजुक पैर वाला तेंदुआ गुम होने लगे थे। दो-तीन वर्षों से निरंतर क्षेत्र में अपनी चहल कदमी दिखाने वाले तेंदुओं के 35 से 36 जोड़े इस वक्त चंबल के बीहड़ों में चहल कदमी कर रहे हैं।
चंबल अभयारण्य का खुला वातावरण तेंदुओं की ब्रीडिंग के लिए अनुकूल सिद्ध हो रहा है। जिसका जीवंत प्रमाण चंबल के कसौआ बीट के चिकना जंगल में सर्चिंग के दौरान विभाग को एक माद में दो तेंदुआ के नवजात बच्चे स्वस्थ अवस्था में मिले।
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सेंचुअरी अमले ने संबंधित जंगल को चारों तरफ से सुरक्षित कर दिया है। विभागीय कर्मियों को तैनात कर दिए गए हैं, जिससे तेंदुए के प्राकृतिक बास में कोई भी छेड़छाड़ न कर सके। सेंचुअरी विभाग के आला अफसर चंबल के संरक्षित बीहड़ों में तेंदुए की सफल ब्रीडिंग के चलते उत्साहित हैं।
चंबल का खुला प्राकृतिक बास के लिए तेंदुओं के अनुकूल है। चंबल सेंचुअरी रेंज के रेंजर हरि किशोर शुक्ला ने बताया कि बुधवार को चंबल नदी किनारे सर्च अभियान के दौरान तेंदुए की पैरों के निशान मिलने से अनुमान लगा कि पास में कहीं तेंदुए की माद है।
खोजबीन करने पर नदी के किनारे बीहड़ में तेंदुए की माद मिली, जिसमें दो नवजात नर बच्चे जो लगभग एक सप्ताह पूर्व ही जन्म लिए माद के अंदर खेलते मिले। संबंधित जंगल के आसपास ग्रामीणों का जाना वर्जित कर दिया गया है।
विभाग के कर्मचारी सुरेश चंद्र को तैनात किया गया है। चंबल के जंगल में तेंदुए की सफल ब्रीडिंग्र के चलते निरंतर तेंदुए का कुनबा बढ़ना विभाग के लिए गर्व की बात है।
चंबल सेंचुअरी के डीएफओ दिवाकर श्रीवास्तव ने बताया कि चंबल में विगत वर्षों से तेंदुए का कुनबा बढ़ रहा है। दो बच्चे हाल ही में जन्मे विभाग को चंबल नदी किनारे बीहड़ में मिले हैं।
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चंबल का वातावरण तेंदुओं के रखरखाव के लिए अनुकूल है। क्षेत्र में निरंतर जलीय व वन्यजीवों की गणना का कार्य चल रहा है।
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