बकेवर। तापमान में उतार चढ़ाव के बीच सुबह और शाम को शीतलहर से लोगों को कंपकंपी छूट रही है। हालांकि, अभी सुबह से खिली धूप निकल रही है।
मौसम वैज्ञानिकों को अंदेशा है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल ठंड ज्यादा पड़ेगी। ऐसे में किसानों को फसलों के बचाव के लिए सावधानी बरतनी चाहिए।
जिला कृषि अधिकारी अभिनंदन सिंह के अनुसार, पाले का प्रभाव इंसान और पशुओं के साथ फसलों पर भी पड़ता है। अधिक सर्दी से फसलों की उत्पादकता पर असर पड़ता है।
सर्दी के मौसम में फसलों को विशेष देखभाल की जरूरत होती है। पाले से सरसों, चना, आलू, टमाटर, मिर्च, की फसलें प्रभावित होंगी। पाला पड़ने की संभावना को देखते हुए जरूरत के हिसाब से हल्की सिंचाई करते रहना चाहिए।
इससे मिट्टी का तापमान कम नहीं होता है। पाला पड़ने पर सरसों, आलू को बचाने के लिए हवा की दिशा में धुआं करें। पाला पड़ने की संभावना वाले दिनों में मिट्टी की गुड़ाई या जुताई नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने से मिट्टी का तापमान कम हो जाता है।
फिलहाल गेहूं की फसल को कोई नुकसान नहीं है। सरसों, अरहर, आलू की फसल में हल्की नमी बनाए रखने की जरूरत है। बौछारी सिंचाई का फसलों में सबसे ज्यादा लाभ होगा। आलू में सल्फर का छिड़काव करें और हवा की दिशा में धुआं करें।