इटावा। विधानसभा चुनावों की जब बात चलती है तो तमाम रोचक मामले सामने आते हैं। इटावा जिले की तीन विधानसभा सीटों पर पांच महिलाओं ने अलग-अलग समय में जीत दर्ज की। अजब संयोग देखिए इनमें से चार के नाम की शुरुआत एक ही अक्षर एस से होती है।
कांग्रेस और भाजपा को जिले में दो-दो महिला विधायक देने का श्रेय जाता है। जिले में इटावा, भरथना आरक्षित और जसवंतनगर तीन विधानसभा सीटें हैं। जसवंतनगर सीट पर तो सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव और उनके परिवार का एकाधिकार बना हुआ है।
यह सीट ऐसी है, जहां से कभी कोई महिला विधायक निर्वाचित नहीं हुई। बाकी इटावा और भरथना में महिलाओं ने महिलाओं ने अपनी ताकत दिखाई। पूर्व मंत्री सुखदा मिश्रा सबसे पहली विधायक बनी।
इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सरिता भदौरिया विधानसभा पहुंचीं। दोनों के नाम का पहला अक्षर एस है। भरथना में सुखदेवी वर्मा को पहला विधायक होने का श्रेय जाता है। इसी परंपरा को सावित्री कठेरिया आगे बढ़ा रहीं है। दोनों के नाम का पहला अक्षर एस से ही शुरू होता है।
सुखदा मिश्रा बनी पहली महिला मंत्री
इटावा सीट पर चार बार विस चुनाव जीतने का रिकार्ड पूर्व मंत्री सुखदा मिश्रा के नाम है। वे ही एक ऐसी विधायक रहीं जो चार बार एक ही सीट पर चुनाव जीती। जिले की पहली महिला विधायक होने का रिकार्ड भी उनके नाम है।
सुखदा मिश्रा 1974, 1980, 1984 में कांग्रेस से और 1989 में जनता दल से विधायक निर्वाचित होकर विधानसभा पहुंची। जनता दल सरकार में कैबिनेट मंत्री बनी। पहली विधायक के बाद जिले की पहली महिला कैबिनेट मंत्री बनने का गौरव भी उनको हासिल है।
जयवीर, महेंद्र दो-दो बार विधायक बने
जयवीर सिंह भदौरिया और महेंद्र सिंह राजपूत दो बार विधायक का चुनाव जीते। वर्तमान में यहां से भाजपा की सरिता भदौरिया विधायक हैं। इसके बाद लखना सुरक्षित सीट से 80 में कांग्रेस से महारानी दोहरे विधायक बनीं।
लखना का नाम परिसीमन में बदलकर भरथना हो गया। यहां वर्ष 2012 में सपा की सुखदेवी वर्मा विधायक बनीं। 2017 में भाजपा की सावित्री कठेरिया चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंची।
37 साल से वनवास झेल रही कांग्रेस
जिले में कांग्रेस की कभी तूती बोला करती थी। जसवंतनगर में वर्ष 1980 में मुलायम सिंह यादव को पराजित कर विस पहुंचे बलराम सिंह यादव प्रदेश सरकार में मंत्री बने। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बन्रे।
वे 85 तक विधायक रहे। वहीं, सुखदा मिश्रा तीन बार कांग्रेस के टिकट पर विधायक बनीं। उन्हें नारायण दत्त तिवारी के मुख्यमंत्रित्व काल की कैबिनेट में ऊर्जा मंत्री बनाया गया।
सुखदा ने 89 में कांग्रेस को अलविदा कह दिया। इसके बाद जनता दल के टिकट पर चुुनाव जीती। मुलायम सिंह यादव की सरकार में नगर विकास मंत्री रहीं।
उनके कांग्रेस छोड़ते ही जिले में कांग्रेस का अवसान होता चला गया। तब से आज 37 साल गुजर गए कांग्रेस पार्टी हाशिए पर ही है। सपा, भाजपा और बसपा के मुकाबले कांग्रेस पिछड़ती ही रही।