राज्य कर्मचारियों का आंदोलन तीसरे दिन बुधवार को जिला अस्पताल परिसर में
हुआ। अवकाश के बावजूद काफी संख्या में कर्मचारी जुटे और अपनी मांगों के लिए
जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारी नेताओं ने सरकार को चेताते हुए कहा कि यदि
समय रहते लंबित मांगों को लेकर शासनादेश जारी न हुआ तो 23 फरवरी से
बेमियादी आंदोलन किया जाएगा।
बाद में सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन
सौंपा गया। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर
हो रहे इस आंदोलन के अंतिम दिन परिषद के जिलाध्यक्ष दिलीप मिश्र ने कहा कि
प्रदेश सरकार कई वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान नहीं कर रही।
कर्मचारी वर्ग इससे नाराज है।
केंद्रीय कर्मचारियों की सातवें वेतन
आयोग की सिफारिशें एक जनवरी 2015 से लागू हो जाएंगी। उससे पहले पांचवें व
छठवें वेतन विसंगति की सिफारिशें लागू नहीं की जा रही। जिससे कर्मचारियों
को बड़ा नुकसान हो रहा है। सरकार पहले वेतन विसंगति एवं रिजवी समिति के
सुझाव पर अमल करें तभी कर्मचारियों का भला हो सकता है।
परिषद के वरिष्ठ
उपाध्यक्ष अशोक द्विवेदी ने कहा कि सरकार कर्मचारियों की मांगों को न
मानकर उनके साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। जिला मंत्री प्रदीप सक्सेना ने
मांगों के बारे साथी कर्मचारियों को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 7, 14 व
20 वर्ष की सेवा पर तीन प्रोन्नत वेतनमान, केंद्रीय कर्मचारियों के समान
वेतन भत्ते, नकदीकरण की व्यवस्था बहाल हो।
नई पेंशन की जगह पुरानी पेंशन
व्यवस्था लागू हो। दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित किया जाए।
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए। 10 सूत्रीय
मांग पत्र को तत्काल माना जाए। संप्रेक्षक विजय बहादुर सिंह तोमर ने कहा
कि अभी हमारा काम नहीं हुआ है।
अभी लंबे आंदोलन के लिए तैयार रहना है।
नर्सिंग संघ की अध्यक्ष उर्वशी दीक्षित ने कहा कि सभी कर्मचारी साथ रहकर ही
कुछ कर सकते हैं। आंगनबाड़ी संघ की जिलाध्यक्ष सीमा शुक्ला ने अपने संवर्ग
की पीड़ा से अवगत कराया।