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यमुना में नाव पलटने से मौसेरे भाई-बहन की मौत

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फोटो संख्या 20: पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद पप्पन सिंह सेंगर, उनकी पत्नी नीरज व बेटा रितिक ---- यमुना म? - फोटो : ETAWHA
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चकरनगर/इटावा। लॉकडाउन में अपने साधनों से ग्वालियर से औरैया स्थित गांव जा रहा एक परिवार हादसे की चपेट में आ गया। बाइक और स्कूटी से शेरगढ़ घाट तक पहुंचे परिवार ने गांव तक पहुंचने के लिए नाव से यमुना पार करने की कोशिश की। नाव पलटने से 12 वर्षीय बालक और उससे दो साल छोटी मौसेरी बहन की मौत हो गई।
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अनहोनी का शिकार हुआ औरैया के अजीतमल थाना क्षेत्र के बवाइन गांव निवासी पप्पन सिंह (40) पुत्र जगदीश सिंह का परिवार। मध्यप्रदेश के ग्वालियर में प्राइवेट बस परिचालक पप्पन भी पत्नी-बच्चों के साथ लॉकडाउन में घिरे थे। औरैया जनपद के गांव (बवाइन) में मां कमलेश कुमारी के बीमार होने की सूचना पर परिवार के साथ घर लौटने का इरादा बनाया। लॉकडाउन में साधन न मिलने के कारण पप्पन बेटे रितिक (14) व आर्यन (12) को लेकर बाइक से चले। पत्नी नीरज (35) स्कूटी से निकलीं। उनके साथ स्कूटी पर पप्पन के साढ़ू आगरा के खंदौली में हसनपुर निवासी प्रेमकुमार की बेटी ज्ञानू उर्फ प्रीति (10) भी सवार थी।
ग्वालियर से लेकर इटावा जिले तक रास्ते में पुलिस की टोकाटाकी का सामना करता परिवार रविवार सुबह दो दुपहिया वाहनों से गांव के करीब तक पहुंच गया। शेरगढ़ घाट से गांव तक जाने के लिए सभी यमुना पार करने के लिए नाव पर सवार हुए। अन्य सामान के साथ स्कूटी और बाइक भी नाव पर लाद लीं। नाव के कुछ आगे बढ़ने पर बाइक का हेंडिल यमुना के पानी की ओर झुक गया। नाव के किनारे पर पैर रख नाविक ने बाइक का हेंडिल सीधा करना चाहा लेकिन किनारे पर वजन बढ़ने से असंतुलित हो नाव पलट गई। पूरा परिवार पानी में जा गिरा। तैराकी की समझ होने से हाथ-पांव मारकर पप्पन और पत्नी नीरज किनारे तक पहुंचे।
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नीरज ने तीनों बच्चों को भी बाहर खींच लिया लेकिन गोते लगने से बच्चों के पेट में पानी भर गया। वे बेसुध हो गए। कुछ देर में पहुंची पुलिस ने सभी को राजपुर सीएचसी पहुंचाया। वहां आर्यन व ज्ञानू (प्रीती) को मृत घोषित कर दिया गया। बेटे व साढ़ू की बेटी की मौत की जानकारी मिलते ही पप्पन आपा खो बैठे। पत्नी नीरज का भी बुरा हाल हो गया। गांव बवाइन तक कोहराम मच गया।
यमुना के तट पर मौजूद लोगों ने बताया कि नाव पलटते ही नाविक तैरकर निकल भागा। नाव में पांव रखने के उसके तरीके को हादसे की वजह माना जा रहा है। नाव पलटने से पूरे परिवार को संकट में घिरता देख आसपास मौजूद ग्रामीण तत्काल मदद को आगे आए। बच्चों को बाहर निकालने में ग्रामीणों ने खुद की भी परवाह नहीं की। ग्रामीणों के बीच समय से एंबुलेंस न आने को लेकर रोष नजर आया। उनका कहना था कि जिस वक्त बच्चे बाहर निकाले तो उनकी सांसें चल रही थीं। तत्काल एंबुलेंस मिल जाती तो बच्चों को बचाया जा सकता था। सीओ चकरनगर मस्सा सिंह ने बताया कि परिवार ग्वालियर से आया था। लॉकडाउन के कारण वह सड़क से न निकल पाने की वजह से नदी के रास्ते औरैया जिले के बवाइन गांव जा रहे थे। रास्ते में हादसा हो गया।
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