इटावा। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आशीष पांडे ने धोखाधड़ी के मामले में एक भाई को सात साल और जान-माल की धमकी के मामले में दूसरे भाई को एक साल की सजा सुनाई है। दोनों पर साढ़े सत्रह हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। 12 वर्ष चले मुकदमे का फैसला गुरुवार को सुनाया गया।
सहायक अभियोजन अधिकारी प्रभात श्रीवास्तव ने बताया कि एसआरएलटी कालेज के निदेशक राम लखन तिवारी ने कालेज में काम करने वाले पवन दीक्षित व उसके भाई आशुतोष दीक्षित निवासी आदर्श नगर भरथना के खिलाफ इकदिल थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दोनों भाई बैंक से लेनदेन का काम देखते थे। निदेशक और प्रबंधक के हस्ताक्षर किए चेक अलमारी में रखे रहते थे। इसकी जानकारी कॉलेज में रहने वाले पवन को रहती थी।
वर्ष 2009 व 2010 के पवन ने आलमारी से चेकें निकालकर चार लाख 90 हजार पांच सौ रुपये बैंक से निकाल लिए। राम लखन ने उसे कालेज से निकाल दिया। इस पर पवन ने भाई आशुतोष दीक्षित के साथ कॉलेज आकर वेतन मांगा। कुछ दिन बात वेतन देने की बात कहने पर दोनों ने गाली गलौज कर जान से मारने की धमकी दी।
पुलिस ने पवन के खिलाफ धोखाधड़ी व आशुतोष के खिलाफ गाली गलौज व जान माल की धमकी देने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने साक्ष्यों के आधार पर पवन को धोखाधड़ी और आशुतोष को जान से मारने की धमकी देने का दोषी करार दिया।