स्कूल-कालेजों में अब ‘ट्रैफिक क्लास’ लगेगी। इसमें स्टूडेंट्स को ट्रैफिक नियमों व सड़क पर सावधानी आदि के बारे में जानकारी दी जाएगी। इस संबंध में एआरटीओ वीके सिंह ने शिक्षा विभाग के अफसरों व स्कूल-कालेजों के प्रिंसिपलों को पत्र भेजकर अवगत कराया है।
गौरतलब है कि स्कूल और कालेजों में बहुत से छात्र-छात्राएं बाइक और स्कूटी से आते हैं। 16 साल से पहले किसी का ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं बनता है। इसके बाद भी स्कूल प्रशासन ऐसे स्टूडेंट्स पर ध्यान नहीं देता है।
इसी वजह से तमाम छात्र-छात्राएं अक्सर हादसे के शिकार हो जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए अब स्कूल-कालेजों में स्टूडेंट्स को ट्रैफिक रूल बताने के लिए क्लास लगेगी।
यह जानकारी देते हुए एआरटी प्रवर्तन वीके सिंह ने बताया कि इस संबंध में डायट प्राचार्य, डीआईओएस, बीएसए और स्कूल और कालेजों को पत्र भेजा जा रहा है। शिक्षा अधिकारियों और एआरटीओ विभाग की टीम स्कूलों में जाकर छात्र-छात्राओं को ट्रैफिक रूल बताएंगे।
उन्होंने बताया कि 16 साल से 18 साल तक की उम्र के बच्चों के लिए बिना गियर की स्कूटी चलाने के लिए लाइसेंस बनता है। 18 साल उम्र पूरी करने वालों का ही बाइक और कार चलाने का लाइसेंस बनता है।
उन्होंने बताया कि सड़क सुरक्षा के संबंध में छात्र-छात्राओं को जागरूक किया जाएगा। श्री सिंह ने बताया कि वाहन की स्पीड ज्यादा होने पर मानव त्रुटि होने की वजह से 95 फीसदी हादसे होते हैं जबकि पांच फीसदी हादसे वाहन की खराबी से होते हैं। उन्होंने कहा कि अगर वाहन नियमित गति से चलाया जा तो हादसे की गुंजाइश कम होती है।