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प्रत्याशी का इतिहास पढ़े बिना मत करना समर्थन: नड्डा

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इटावा। चुनावी महासंग्राम के बीच शनिवार को यहां पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने किसी दल का नाम लिए बिना एक तीर से कई निशाने साधे। की-वोटर्स (प्रबुद्ध व सामाजिक क्षेत्र की हस्तियां) से संवाद में उन्होंने सचेतक के अंदाज में कहा कि ‘चुनाव में विरोधी दल तरह-तरह से लुभाते हैं, नकारात्मक बातें भी होती हैं, किसी भी दल को समर्थन देने से पूर्व उनका इतिहास जरूर पढ़ लेना।
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बोले, यह देख लो जो वादा किया उसे पूरा किया या नहीं, जिसने पहले जो किया है, वही आगे भी करेगा’। शनिवार को खराब मौसम की वजह से बरेली से हेलीकॉप्टर से करीब तीन घंटे देरी से दोपहर 3:07 बजे इटावा क्लब सभागार में प्रभावी मतदाताओं के बीच पहुंचते ही उनका जोरदार स्वागत किया गया।
उनके आने में खासा विलंब होने के बावजूद मतदाता अपने स्थानों पर बैठे रहे और उन्हें सुनकर ही लौटे। इनमें चिकित्सक, प्रोफेसर, अधिवक्ता, शिक्षक आदि शामिल रहे।
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इटावा क्लब में भाजपा अध्यक्ष ने इटावा की धरती को भगवान राम, कृष्ण, बौद्ध, संतों की नगरी, संस्कृति की धरती, पुण्य नगरी, आजादी की लड़ाई में महान क्रांतिकारियों को नमन करते हुए अपना संबोधन शुरू किया।
अपने 40 मिनट के संबोधन में उन्होंने लोगों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में मतदान कर प्रदेश को नई दिशा देने की अपील की। देरी से आने पर अफसोस जताते हुए उन्होंने कहा मौसम पर जोर नहीं चल पाया।
मतदाताओं में जोश और उमंग भरते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव की तत्परता यहां के चेहरों से दिखाई दे रही है, जो उन्हें भी तरोताजा कर दिया है।
पार्टी की उपलब्धियां गिनाते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा ने जो कहा है उसे पूरा भी किया है, चाहे जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की बात हो या राम मंदिर निर्माण की।
इस दौरान उपस्थित लोगों से पूछा क्या सपा ऐसा कर सकती है। भाजपा विकास पर चलने वाली पार्टी है, जबकि अन्य दल परिवारवाद पर चलने वाले हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा विचारों की पार्टी है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की संस्कृति में बदलाव ला दिया है।
सपा पर ने तंज कसते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि हम काम करते हैं, वह इत्र छिड़कते हैं। कुछ लोग जेल से व कुछ बेल (जमानत) पर चुनाव लड़ रहे हैं, सवाल दागे, ‘आखिर क्या मजबूरी है, क्यों दोस्ती नहीं टूटी’।
सपा प्रमुख का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि जिन्होंने कभी अनाज नहीं लिया, वह अन्न हाथ में लेकर घूम रहे हैं। टीका के नाम पर अखिलेश यादव ने बरगलाने का कार्य किया।
उन्होंने कहा कि नेता की नीति से नियत का पता चल जाता है। आज बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं। ऐसे लोगों को सबक सिखाने के लिए कमल के निशान वाले बटन को दबाना है। बोले शांति चाहते हो, विकास चाहते हो तो सही रास्ता चुनों।
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