इटावा। क्षय रोग (टीबी) के खात्मे को लेकर चलाए जा रहे अभियानों में अब ग्राम प्रधानों की भी मदद ली जाएगी। जनपद के सभी आठों विकास खंडों में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत ग्राम प्रधानों को क्षय रोग के विषय में जानकारी दी जा रही है।
उन्हें टीबी के लक्षणों और सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध इलाज के बारे में भी बताया जा रहा है। जिला कार्यक्रम समन्वयक कंचन तिवारी ने ताखा ब्लॉक के क्षेत्रीय प्रधानों व लोगों को टीबी के बारे में जागरूक किया।
बताया कि दो हफ्ते से ज्यादा समय से खांसी आना, दो हफ्ते से अधिक बुखार आना, बलगम में खून आना, वजन कम होना, भूख न लगना, रात में पसीना आना टीबी के लक्षण हो सकते हैं। टीबी एक संक्रामक बीमारी है।
यह शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित कर सकती है। यह फेफड़े को प्रभावित करती है। इसके संक्रमण का असर रोगी के बोलने, छींकने, खांसने व थूकने की स्थिति में निकलने वाली बूंदें हवा के माध्यम से दूसरे को प्रभावित कर सकतीं हैं।
प्रधानों से रोग की गंभीरता को देखते हुए बताया इन लक्षणों वाले किसी भी व्यक्ति की जानकारी मिलते ही उसे तत्काल सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर भेजें। मुफ्त जांच और इलाज होने के अलावा रोगी के खाते में इलाज के दौरान हर माह 500 रुपये भेजे जाते हैं।
सुविधा का लाभ भी मिलेगा। बीमारी को वर्ष 2025 तक समाप्त करने में भूमिका भी निभाएं। कंचन ने बताया कि भरथना, उदी, बसरेहर ब्लॉक में प्रशिक्षण कराया जा चुका है और जनपद के अन्य ब्लॉकों में भी समय सारिणी के अनुसार प्रधानों का प्रशिक्षण जारी रहेगा।
जिला पीपीएम समन्वयक निर्मल कुमार ने बताया चिकित्सक के निर्देशानुसार निश्चित समयावधि तक दवाइयां लेने से टीबी ठीक हो सकती है। जिस किसी को भी टीबी के लक्षण नजर आते हैं तो वह जल्द से जल्द सरकारी अस्पताल में जाकर इलाज करवा सकते हैं। अस्पताल में बलगम की जांच बहुत जल्द तथा मुफ्त की जाती है। कार्यक्रम में डीपीटीसी अनस भी मौजूद रहे।