इटावा। आलू किसानों को लगातार दूसरी साल जोर का झटका लगा है। इस साल कच्ची खोद के समय आलू का भाव कम होने से किसान की लागत भी निकलना मुश्किल हो रहा है।
उधर, पिछले साल कच्ची खोद में अच्छा भाव न मिलने से किसानों ने बड़ी संख्या में आलू को स्टोरेज किया था। बुआई के बाद पुराने आलू का भी भाव अच्छा नहीं मिल पाया। इस वजह से किसान को आलू में दोहरी मार पड़ी है।
इस साल अभी मंडी में 250 से 350 रुपये प्रति पैकेट का भाव मिल रहा है। एक पैकेट में आलू 50 से 55 किलो तक रहता है। कच्ची फसल का अच्छा भाव न मिलने की वजह से आलू किसान मायूस हैं।
ऐसा कम ही होता है कि लगातार दो साल फसल का अच्छा भाव न मिले। पिछले साल भी कच्ची फसल का अच्छा भाव न मिलने से किसान ने आलू का स्टोरेज बढ़ा दिया था।
पिछले साल इटावा के 59 कोल्ड स्टोरेज में सात लाख मीट्रिक टन से अधिक आलू स्टोरेज किया गया था, जबकि इटावा में लगभग 8,75 हजार मीट्रिक टन आलू स्टोरेज की क्षमता है। उद्यान विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आलू का भंडारण पिछले साल बड़ी मात्रा में किया गया था।
इस वजह से आलू की उपलब्धता बाजार में पूरी साल रही, जिससे किसान को अच्छे रेट नहीं मिल सके। इस बार भी आलू की बिजाई के बाद पुराने आलू के भाव एकदम से गिर गए, जिससे कुछ किसानों ने आलू कोल्ड स्टोरेज से उठाया ही नहीं।
एक अनुमान के अनुसार, लगभग 10 फीसदी आलू कोल्ड स्टोरेज में ही पड़ा रह गया। पुराना आलू उठने से पहले ही बाजार में नया आलू आ गया। नई फसल की एकदम आवक के बाद भाव नीचे आ गए। इसके अलावा कच्ची फसल में पैदावार भी अच्छी नहीं मिल रही है।
इस साल फिर बढ़ेगा स्टोरेज
आलू का स्टोरेज इस साल फिर बढ़ जाएगा। इटावा मंडी के व्यापारी राजेंद्र शाक्य ने बताया कि आलू का भाव अच्छा मिलने पर किसान कच्ची फसल खोदकर उसमें गेहूं बो देता है।
इस बार कच्ची फसल का भाव न मिलने से किसान ने कच्ची फसल खेतों में रोक दी है। अब आलू की खुदाई फसल पकने पर ही करेगा, जिससे इस साल भी आलू का स्टोरेज बढ़ेगा और आलू की उपलब्धता पूरी साल रहेगी।
शाक्य ने बताया कि इस बार आलू की पैदावार भी उतनी अच्छी नहीं है। कच्ची फसल में एक बीघे में आलू 50 पैकेट निकलता है, तब किसान फायदे में रहता है, जबकि इस बार 35 पैकेट तक ही निकल रहा है।
नहीं घटा आलू का रकबा
पिछले साल कीमत में झटका लगने के बाद भी आलू के रकबे में मामूली गिरावट आई है। वर्ष 2020-21 में आलू का रकबा 20 हजार हेक्टेयर था और 50 लाख मीट्रिक टन से अधिक की पैदावार हुई थी।
इस साल आलू का रकबा 19860 हेक्टेयर है, जबकि 2019-20 में आलू का रकबा 19890 हेक्टेयर था। इस लिहाज से देखा जाएगा तो आलू के रकबे में बहुत अधिक कमी नहीं आई, इसलिए इस बार भी आलू के भाव चढ़ने की बहुत अधिक उम्मीद नहीं है।
उद्यान विभाग ने कर दी बीज की आपूर्ति
जिले में उद्यान विभाग किसानों को बड़ी मात्रा में बीज की आपूर्ति करता है। इस साल उद्यान विभाग ने 1600 क्विंटल बीज किसानों को मुहैया कराया। अधिकतर बड़े किसानों ने उद्यान विभाग से ही बीज लिया, जबकि बाजार से छोटे किसानों ने बीज
लिया। इसके अलावा पड़ोसी जिलों में भी बीज की मांग कम रही। इस वजह से आलू का भाव नहीं चढ़ पाया।
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बोले आलू किसान
फोटो परिचय-35- नंदकिशोर।
अभी आलू मुश्किल से पांच रुपये किलो बिक रहा है, इससे लागत भी नहीं निकल रही, जिससे किसान ने फसल रोक दी है, इसलिए आगे भी आलू का भाव बढ़ने की उम्मीद नहीं है। हालांकि, उत्पादन अच्छा होने पर भरपाई हो सकती है।