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-परिवार की एकता को सिर्फ कार्यकर्ता भी बनने को तैयार : शिवपाल

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सैफई के चंदगीराम स्टेडियम में जन्म दिन का केक काटते शिवपाल सिंह यादव, रामसेवक एवं प्रधान दर्शन सि - फोटो : ETAWHA
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इटावा। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि परिवार की एकता कायम रहे इसके लिए वो किसी भी तरह का समर्पण करने के लिए तैयार हैं। यदि सबकी राय होगी तो वे सिर्फ कार्यकर्ता बनकर ही काम करेंगे।
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शिवपाल यादव शुक्रवार को सैफई के चंदगीराम स्पोर्ट्स स्टेडियम में सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के जन्मदिवस के मौके पर आयोजित समारोह में बोल रहे थे। नेताजी के जन्मदिन पर जुटे लोगों से आवाहन किया कि आप लोग चाहो तो वो राजनीति में कार्यकर्ता बनने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि अगर देश में परिवर्तन लाना है तो त्याग और संघर्ष करना ही होगा। यह सब नेताजी ने किया है। उन्होंने कहा कि नेताजी प्रधानमंत्री पहले ही बन जाते। उन्होंने कहा कि एक कहावत है अगर आप बिजनेस कर रहे हो और मुनीम को मालिक बना देंगे तो भट्टा बैठेगा ही। कुछ ऐसा ही नेताजी ने भी किया। रक्षा मंत्री बने, तीन बार मुख्यमंत्री बने। यह भी सही है दो बार तो मुख्यमंत्री बनाने में हमारा बहुत बड़ा योगदान रहा। उन्होंने कहा कि कभी-कभी तो अपने लोग भी धोखा देते हैं लेकिन कभी हिम्मत नहीं हारना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी के समस्त लोगों ने बैठक की है। इसमें यह निर्णय लिया गया कि नेता जी का जन्मदिन एकता के रूप में मनाया जाए। शिवपाल ने कहा कि मैंने हमेशा नेताजी की बात को माना है और कभी उनकी बात को टाला नहीं। हम चाहते हैं परिवार एक रहे। हमने कभी नेताजी की बात नहीं गिराई । जिन लोगों ने गिराया है वे लोग आज भी उनकी बात नहीं मान रहे हैं।
समाजवादी विचारधारा से जुड़े सभी लोगों ने हमसे कहा कि अगर भतीजा बात नहीं मान रहा है तो आप ही झुक जाओ। मैंने सबकी बात मानी। कहा कि मुझे मुख्यमंत्री नहीं बनना है अगर मुझे मुख्यमंत्री बनना होता तो 2003 में ही मुख्यमंत्री बन जाता। हम नेता जी से बोल देते तो नेताजी हमें ही मुख्यमंत्री बनाते लेकिन मुझे नहीं बनना था।
उन्होंने कहा कि हम प्रोफेसर के यहां गए थे। हम ने यह कहा कि मुझे कुछ नहीं चाहिए सब लोग एक रहें। उनकी ओर से अखबारों में बयान दिया था कि ऐसी पार्टियां तो हमने बहुत बनती देखी हैं जिनको 500 वोट नहीं मिलेंगे। पूर्वांचल में जाएंगे तो पीटे जाएंगे इसलिए हमने फिरोजाबाद से चुनाव लड़ा था।
प्रो. रामगोपाल की ओर इशारा करते हुए कहा कि उनकी तरफ केंद्र सरकार का हाथ था मेरे पास तो पैसा भी नहीं था। उसके बावजूद भी मुझे परिवार की बात माननी पड़ी। फिरोजाबाद में मुझे वोट कम मिला और वोट भाजपा में चला गया। बस मैं यह कहना चाहता हूं मैं तो नेताजी की बात आज भी मानने को तैयार हूं। पंच चुन लेना समस्त बुजुर्ग बैठ जाएं ।
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हम बात मानने को तैयार हैं । इसलिए हम चाहते हैं समाजवादी विचारधारा के लोग एक साथ होकर लोहिया जी के बताए रास्ते पर चलें।
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