इटावा। जिले के ग्राम लालपुरा निवासी सुमित प्रताप सिंह दिल्ली पुलिस में कार्यरत हैं लेकिन उन्होंने अपनी पहचान एक पुलिस वाले से ज्यादा साहित्यकार और लेखक के रूप में ज्यादा बना रखी है। यूट्यूब चैनल पर उनकी लघु फिल्म ‘लाल बत्ती का खेल’ चर्चा का विषय बन रही है।
उन्होंने इस शॉर्ट फिल्म के माध्यम से भिक्षावृत्ति की समस्या पर सशक्त प्रहार किया है। साथ ही सड़कों पर भीख मांगने वालों की सच्चाई से परिचय करवाया है। फिल्म में पुनीत कुमार व गुलशन कुमार ने अभिनय किया है। डायरेक्टर रवि कुमार हैं। लघु फिल्म को पुलिस के उजले और सकारात्मक पक्ष के लिए संघर्षरत यूट्यूब चैनल सावधान! पुलिस मंच पर है पर रिलीज किया गया है।
सुमित प्रताप सिंह इससे पहले भी कई लघु फिल्म की कहानी लिख चुके हैं। साथ ही उनकी कविता, व्यंग्य एवं कहानियों पर लिखी गई कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्हें लेखन के लिए कई पुरस्कार एवं सम्मान भी प्राप्त हो चुके हैं। लाल बत्ती का खेल दिखाती लघु फिल्म को भाजपा की जिला मंत्री डॉ. ज्योति वर्मा ने भी सराहा है।
चर्चित पुस्तकें : पुलिस की ट्रेनिंग, मुसीबतों की रेनिंग (कविता संग्रह), व्यंग्यस्ते (व्यंग्य संग्रह), नो कमेंट (व्यंग्य संग्रह), सावधान! पुलिस मंच पर है (कविता संग्रह), सहिष्णुता की खोज (व्यंग्य संग्रह), ये दिल सेल्फिय़ाना (व्यंग्य संग्रह), बिलकुल सच्चावाला (कहानी संग्रह), जैसे थे (हास्य व्यंग्य उपन्यास)
पुरस्कार व सम्मान : युवा हास्य कवि पुरस्कार-2007 (द्वितीय) (डॉ. अशोक चक्रधर द्वारा प्रदान किया गया), प्रहरी अवार्ड-2011
-परिकल्पना श्रेष्ठ युवा व्यंग्यकार सम्मान-2011 राजीव गांधी एक्सीलेंस अवार्ड-2013, आगमन साहित्य सम्मान-2013, शिशु वल्लभ अलंकरण-2019
एंथम: दिल्ली एंथम, इटावा एंथम, दामिनी एंथम, हरियाणा एंथम, एंटी रोड रेज एंथम