कलश यात्रा में शामिल महिलाएं। संवाद
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बकेवर। श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ पर कस्बा बकेवर में बैंडबाजे और ढोल-मजीरे के साथ महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली। जगह-जगह पुष्प वर्षा कर कलश यत्रा का स्वागत किया गया। कलश यात्रा में परीक्षित रमा तिवारी आगे चल रहीं थीं। यज्ञ स्थल पर पहुंचने पर कथा वाचक आचार्य सुशील शुक्ला ने वेद मंत्रों के साथ कलश स्थापित कराए। पूरा पंडाल श्रीकृष्ण एवं श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद कथा का शुभारंभ हुआ।
औरैया जिले से आए कथा वाचक सुशील शुक्ला ने बताया कि जन्म के समय भी कलश स्थापना की जाती है और मरने के समय भी शरीर के साथ कलश विसर्जित किया जाता है। कलश पर रखा नारियल इस बात की शिक्षा देता है कि परिवार के मुखिया को ऊपर से सख्त और अंदर से मुलायम होना चाहिए। इससे जीवन की गाड़ी बेहतर चलती है।
कलश के ऊपर रखी जाने वाली माला संदेश देती है कि जिस तरह फूल महकता है, उसी प्रकार मनुष्य का जीवन भी दूसरों को सुगंध देने वाला होना चाहिए। यज्ञकर्ता स्वामी हरिहरानंद ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने मात्र से प्राणियों को जीवन भर के पाप से मुक्ति मिल जाती है।
इस मौके पर अवनीश तिवारी, राहुल शुक्ला, चेयरमैन विनोद दोहरे, शीलू शर्मा अंकित पाठक, अंकित चौधरी, नवल किशोर पाठक, सोनू यादव, मनीष कुमार भी मौजूद रहे।