इटावा। राजकीय पक्षी सारस के लिए मशहूर सरसई नावर झील को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए डीएफओ इटावा की ओर से केंद्र सरकार को एक प्रोजेक्ट भेजा गया है।
इस प्रोजेक्ट की मंजूरी के बाद विकास कार्य शुरू किए जाएंगे। सरसईनावर के रामसर साइट में शामिल होने के बाद विकास की उम्मीदें बढ़ गईं हैं। हालांकि, कोरोना की वजह से फंड मिलने में रुकावट के चलते अभी नई गतिविधियां रुकी हुई हैं। फंड मिलते ही प्रोजेक्ट की रफ्तार बढ़ जाएगी।
सरसईनावर झील लगभग 167 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्र में फैली है। छह गांवों के बीच बनी झील में बड़ी संख्या में सारस यहां अठखेलियां करते मिल जाएंगे। सुबह और शाम 200 से अधिक सारसों की संख्या पाई जाती है।
सर्दी के मौसम में ठंडे प्रदेशों से बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी भी पहुंचते हैं। इन पक्षियों का प्रवास लगभग दो महीने रहता है। डीएफओ अतुल कांत शुक्ला ने बताया कि टाइगर सफारी से इसकी कनेक्टिविटी बढ़ाने से यहां पर पर्यटन की अच्छी संभावना है।
बताया कि सफारी और शहर से जोड़ने वाली सड़कों का निर्माण कराने के लिए वे जिला प्रशासन के संपर्क में हैं। डीएफओ ने कहा कि केंद्र सरकार को इसका प्रोजेक्ट भेजा गया है, वहां से फंड मिलते ही यहां पर विकास कार्य शुरू करा दिए जाएंगे।
बताया कि फंड मिलते ही झील की गहराई बढ़ाई जाएगी, साथ ही सुरक्षा के लिए मेड़ बनाई जाएगी। झील में गेट लगाए जाएंगे, जिससे पानी अधिक बढ़ने पर उन्हें खोल जा सके।
सारस और दूसरे अन्य पक्षियों को प्रजनन में मदद मिल सके, इसके लिए मिट्टी के टापू बनाए जाएंगे। पक्षियों की सुरक्षा के लिए वाच टावर भी बनाए जाएंगे। यदि पर्यटक पहुंचते हैं तो उनके लिए कैंटीन की व्यवस्था की जाएगी।
झील में सारस के अलावा अन्य 13 प्रजातियों के पक्षी दूसरे देशों से यहां पहुंचते हैं। इनमें गॉडविल, पेंटेड स्टार्क, ओपन विल स्टार्क, ब्लैक हेड आइविश, बेकुर, स्पॉट विल डक, पिनटेल, नाइट हेरोन, रडी शेल्डक जैसे विदेशी पक्षी यहां पहुंचते हैं।
ये पक्षी उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका के देशों में पहुंचते हैं। इसके अलावा म्यांमार से भी बड़ी संख्या में पक्षी पहुंचते हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में स्थानीय प्रजातियों के पक्षी भी यहां बड़ी संख्या में पाए जाते हैं।
कोरोना ने रोकी प्रोजेक्ट की रफ्तार
रामसर साइट घोषित होने के बाद सरसईनावर झील के विकास की उम्मीदें बढ़ गईं हैं। सरसईनावर को फरवरी 2019 में रामसर साइट में शामिल किया गया था।
रामसर साइट में शामिल होने के बाद प्रोजेक्ट के लिए कोरोना के चलते फंड नहीं मिल सका। अब फिर से योजना बनाकर भेजी गई है और फंड मिलते ही काम शुरू करा दिए जाएंगे।
क्या है रामसर कन्वेंशन---
ईरान के रामसर शहर में 2 फरवरी 1971 को एक सम्मेलन हुआ था, जिसमें दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसी को रामसर कन्वेंशन के नाम से जाना जाता है।
इसका गठन दुनिया भर के वेटलैंड को संरक्षित करने को किया गया। इसमें दुनिया के 170 से ज्यादा देश भागीदार हैं। पूरी दुनिया में लगभग 2300 से अधिक वेटलैंड हैं।
भारत में 47 और उत्तर प्रदेश में 10 वेटलैंड रामसर साइट में शामिल किए गए हैं। वेटलैंड प्रकृति एवं पर्यावरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ये वेटलैंड जलस्तर बढ़ाने, जैव विविधता के संरक्षण एवं संवर्द्धन के साथ प्रवासी पक्षियों के मौसमी आवास के रूप में भी उपयोगी हैं।
इनके संरक्षण पर एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) का बहुत जोर रहता है।