इटावा। पिछले कई दिनों से दोपहर बाद तक छाये रहने वाले कोहरे और बदली की वजह से एक से दो घंटे मिल रही धूप से लोगों को कड़कड़ाती ठंड से राहत नहीं मिल पा रही है।
हालांकि, 15 जनवरी को न्यूनतम तापमान चार डिग्री रहने के बाद से रोजाना एक-एक डिग्री बढ़ता जा रहा। बृहस्पतिवार को न्यूनतम तापमान आठ डिग्री रहा, जबकि अधिकतम तापमान 19 डिग्री रहा।
लगातार छह दिनों से सुबह की शुरुआत कोहरे और गलन भरी सर्दी से होने का सिलसिला बृहस्पतिवार को भी जारी रहा।
ऐसी स्थिति में दोपहर बाद तक कोहरे के छंटने और दोपहर ढाई बजे से निकलने वाली कुछ देर की धूप से भी लोगों को राहत नहीं मिलने से खुद को गर्म कपड़ों से लपेट कर रहने के लिए विवश हैं।
आलम यह है कि सर्दी बाहर ही नहीं घरों के अंदर भी लोगों को कंपकंपाने में लगी हुई है। लिहाजा लोग घरों में भी सिर और कान ढंक कर रह रहे हैं। सूर्य देव के उत्तरायण होने के बावजूद लोगों को बमुश्किल कुछ घंटे की धूप ही मिल पा रही है।
बावजूद इसके लगभग हर घर का कोई न कोई सदस्य सर्दी की वजह से खांसी, जुकाम से पीड़ित है। हालांकि, ज्यादातर लोग देसी उपचार खासकर काढ़े का प्रयोग कर जल्द खांसी, जुकाम को भगाने में लगे हुए हैं।
बढ़ती सर्दी और दोपहर दो बजे के बाद निकलने वाली धूप की वजह से जिला अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या में भी गिरावट देखने को मिल रही हैं।
पर्चा काउंटर प्रभारी मीना चतुर्वेदी के अनुसार, बुधवार को 549 की अपेक्षा बृहस्पतिवार को 57 कम यानी 492 पर्चे बने। करीब सप्ताह भर से पड़ने वाली हाड़कंपाऊ सर्दी में राहत की बात यह देखने को मिल रही कि हवाएं नहीं चल रही हैं।
पेड़ के पत्ते दिनभर जरा भी नहीं हिलते दिखाई पड़ रहे हैं। अन्यथा लोगों की मुश्किलें और भी ज्यादा बढ़ जातीं। हालांकि, चिंता करने की बात यह है कि मौसम वैज्ञानिक बारिश होने की संभावना जताने से भी इनकार नहीं कर रहे हैं।
कड़कड़ाती सर्दी से निजात मिलने पर लोगों का कहना है कि मकर संक्रांति के बाद मौसम में काफी बदलाव देखने को मिलता था, लेकिन लंबे अरसे बाद मकर संक्रांति के बाद ऐसी ठंड पड़ रही, जिसने सभी को हिलाकर रख दिया है।
सर्दी से बचाने के लिए कारोबारी हों या घरों में रहने वाले लोग सभी आग जलाकर सर्दी को दूर भगाने में लगे हुए हैं। मौसम के हालात को देखकर यही लगता है कि अभी कुछ और दिन ऐसी ही हाड़कंपाऊ सर्दी का सामना करना पड़ सकता है।
23 से मौसम खुलने की संभावना
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक इंजीनियर भूपेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि 23 जनवरी से मौसम खुलने की संभावना नजर आ रही है। फसलों के लिए धूप भी जरूरी है।
गेहूं के लिए अच्छा है। हालांकि, फूल वाली फसलों में सरसों व चना के लिए यह मौसम ठीक नहीं है। बताया कि 14 जनवरी के बाद सूर्यदेव उत्तरायण हो चुके हैं। दिन में सूर्य को तेज बढ़ता जाएगा, ऐसी स्थिति में 23 जनवरी से मौसम खुलने की संभावना है।
कहा कि धूप न निकलने से आलू में भी झुलसा रोग लगने लगा है। हालांकि, जिन किसानों ने आलू को झुलसा रोग से बचाने के लिए खेत में तीनों दवाओं का छिड़काव कर दिया, उनकी फसल बच जाएगी।
थोड़ी देर निकली धूप से मिली राहत
महेवा। पिछले छह दिन से शीतलहर और गलन से परेशान लोगों को बृहस्पतिवार को कुछ देर के लिए निकली धूप से राहत मिली। कोहरे की सफेद चादर में लिपटी सुबह और बादल देख बारिश का अनुमान लगाया जा रहा था।
सर्दी के कारण लोग अलाव तापते नजर आए। मकर संक्रांति से मौसम में बदलाव बना हुआ है। इससे पहले 10 जनवरी से रुक-रुक कर बारिश तीन दिन हुई, जिससे गलन के साथ सर्दी बढ़ी है।
सुबह से ही घना कोहरा रहा, जिससे हेड लाइट जलाकर वाहन आते जाते नजर आए। दोपहर बाद हल्की धूप नजर आई, इससे लोगों ने थोड़ी राहत महसूस की।
परिवर्तन के साथ ही मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। बारिश की संभावना है। शुक्रवार को कुछ देर के लिए धूप रहेगी। वही सरसों व आलू की फसलों पर ज्यादा प्रभाव देखने को मिला है। किसानों को पाला और कोहरे से बचाव के लिए फसलों को हल्का धुआं दिखाने की जरूरत है।
- राजेश चौबे, एडीओ कृषि