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Etawah News: मानसून शुरू, सड़कों के गड्ढों व कीचड़ से तीन माह जूझने के लिए रहें तैयार

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फोटो 07::छिमारा-जसवंतनगर-कचौराघाट मार्ग पर कुछ इस प्रकार है गड्ढे। संवाद
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इटावा। प्रदेश सरकार ने सड़क निर्माण में आ रही आर्थिक अड़चन दूर करने के लिए डामर (बिटुमिन) की बढ़ी हुई कीमत का अतिरिक्त भार स्वयं वहन करने का फैसला कर लिया है लेकिन इसके बावजूद जिले में सड़क निर्माण कार्य रफ्तार नहीं पकड़ पा रहे हैं। वजह साफ है कि डामर की आपूर्ति अब भी सामान्य नहीं हो सकी है। जिसके कारण जिले की 117 सड़कों में अधिकांश में काम पूरा नहीं हो पा रहा है और मानसून शुरू होने के साथ इनके निर्माण की उम्मीद भी फिलहाल खत्म हो गई है। अब लोगों को अगले करीब तीन महीने तक गड्ढों, उखड़ी सड़कों और कीचड़ भरे रास्तों से होकर गुजरना पड़ेगा।
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लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड, निर्माण खंड, निर्माण खंड-एक और निर्माण खंड-तीन की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 में अन्य जिला मार्गों और ग्रामीण सड़कों के निर्माण, नवीनीकरण एवं सुदृढ़ीकरण के प्रस्ताव शासन को भेजे गए थे। शासन ने कुल 174 सड़कों को मंजूरी दी, लेकिन इनमें से 117 सड़कें डामर की कमी के कारण प्रभावित रहीं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि डामर की कमी के कारण इनमें से अधिकांश सड़कों का निर्माण या मरम्मत का काम शुरू नहीं हो पाया है।
इन परियोजनाओं पर कुल पांच करोड़ 79 लाख 48 हजार रुपये खर्च किए जाने हैं। इनमें इटावा-मैनपुरी मार्ग से बिजपुरी खेड़ा तक 5.60 किलोमीटर लंबी सड़क का 99 लाख रुपये का कार्य, बलरई-गदोखर मार्ग का 1.10 करोड़ रुपये का निर्माण, सैफई लिंक मार्ग पर 50 लाख रुपये तथा छिमारा-जसवंतनगर-कचौराघाट मार्ग पर 75 लाख रुपये की परियोजना प्रमुख हैं।
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इसके अलावा कई ग्रामीण संपर्क मार्गों का नवीनीकरण और सुदृढ़ीकरण भी अधूरा पड़ा है। इन मार्गों के खराब होने से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों, किसानों, छात्रों और मरीजों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अब बारिश शुरू होने से सड़क निर्माण की तकनीकी संभावनाएं भी लगभग समाप्त हो गई हैं। लगातार बारिश के दौरान डामर बिछाने का कार्य मानकों के अनुरूप नहीं हो सकता। ऐसे में अधिकांश परियोजनाओं पर काम मानसून समाप्त होने के बाद ही शुरू हो सकेगा। तब तक लोगों को जर्जर सड़कों पर सफर करने और गड्ढों से जूझने के लिए मजबूर रहना होगा।
दोगुनी हो गई डामर की कीमत
विभागीय ठेकेदारों के अनुसार सड़क निर्माण में प्रयुक्त बिटुमिन-10, बिटुमिन-30 और बिटुमिन-40 श्रेणी के डामर की कीमतों में पिछले कुछ महीनों में भारी बढ़ोतरी हुई थी। मार्च 2026 तक जो डामर प्रति टैंकर 45 से 50 हजार रुपये में उपलब्ध था, उसकी कीमत अप्रैल और मई में बढ़कर करीब 88 से 90 हजार रुपये प्रति टैंकर पहुंच गई। ठेकेदारों का कहना है कि सरकार की मंजूरी मिलने के बाद उन्होंने डामर की मांग भेज दी है, लेकिन पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो रही।
वर्जन
जिले की 117 सड़कों के टेंडर प्रक्रिया मार्च में हो गई थी। इसके बाद डामर की किल्लत शुरू हो गई। इसके चलते कुछ ही काम हो पाए, फिर ठेकेदारों ने डामर की कीमतों की बात कहकर काम बंद कर दिया। इसके बाद शासन की ओर से डामर की अतिरिक्त कीमत वहन करने की बात कही गई। इससे कुछ परियोजनाओं ने गति पकड़ी लेकिन रिफाइनरी से अभी भी डामर की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इसके कारण काम प्रभावित है। बारिश शुरू हो गई तो डामर का काम बरसात बाद ही संभव हो पाएगा। -राकेश भूषण, नोडल व एक्सईएन प्रांतीय खंड
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