फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

40 हजार टन कूड़े से बनेगी खाद

विज्ञापन
विज्ञापन
इटावा। शहर से छह किमी दूर कामेत में बने कूड़ा निस्तारण केंद्र में जमा करीब 40 हजार टन कचरा जल्द निस्तारित होगा। इसके लिए ग्वालियर और मुंबई की कंपनियों को ठेका दिया गया है। यहां कूड़े के पहाड़ से पॉलिथीन, गत्ता, कागज आदि को अलग करके उसे उपयोग में लिया जाएगा। वहीं बचे कचरे से खाद बनाई जाएगी। कंपनियों ने यहां अपनी मशीनें लगा ली हैं।
विज्ञापन

निस्तारण केंद्र में कूड़े का ढेर बढ़ता जा रहा है। यहां हर रोज करीब 70 टन कूड़ा डाला जाता है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी विनय कुमार मणि त्रिपाठी ने बताया कि अभी डंपिंग यार्ड में 40 हजार टन कूड़ा जमा है। यह पहाड़ की तरह दिखता है। इसके निस्तारण के लिए सीएनडीएस(कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज) ने 4.43 करोड़ रुपये का ठेका ग्वालियर की कंपनी मेसर्स एसआर मैप टेक्नोलॉजी ग्वालियर एवं मेसर्स समर्थ सॉफ्टटेक सॉल्यूशंस प्रा. लि. नवी मुंबई को दिया है। यह कंपनियां मशीन के माध्यम से कूड़े को प्रोसेस करके सभी घटक अलग-अलग करेंगी। प्लास्टिक वेस्ट अलग करके रिसाइकिल के लिए भेजा जाएगा। वहीं कागज, गत्ते का कूड़ा भी अलग किया जाएगा। अलग करने के बाद जो कूड़ा बचेगा, उसका कंपोस्ट बनाया जाएगा। कूड़े से निकले प्लास्टिक के निस्तारण की जिम्मेदारी कंपनी की ही होगी। कंपनियां प्लास्टिक को या तो सीमेंट फैक्टरियों को देगी या इन्हें सड़क निर्माण करने वालों को देगी।
इस कूड़े को कंपोस्ट बनाने में सबसे बड़ी बाधा पॉलिथीन है। अभी नगर पालिका के मानक अनुसार शहर से निकलने वाले कूड़े में कम से कम दो फीसदी पॉलिथीन होती है। यानि शहर से प्रतिदिन 70 टन कूड़ा निकलता है, इस लिहाज से प्रतिदिन साढ़े तीन क्विंटल पॉलिथीन शहर से निकलती है। डंपिंग यार्ड में अभी 40 हजार टन कूड़ा जमा है, इसके हिसाब से लगभग दो हजार क्विंटल पॉलिथीन को कूड़े से अलग करना होगा, उसके बाद ही कूड़े को कंपोस्ट में तब्दील किया जा सकेगा।
विज्ञापन

नगर पालिका की ओर से अभी शहर के कुछ वार्डों में कंपोस्टर लगाकर कूड़े को कंपोस्ट में बदला जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन के जिला कार्यक्रम अधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि शहर में 15 कंपोस्टर लगाए गए हैं। कंपोस्ट बनाने के लिए कूड़े को चार वर्गों में विभाजित किया गया है। जो गीला कूड़ा है उसे कंपोस्ट बनाने के लिए कंपोस्टर में डाला जाता है। लगभग तीस दिन में कंपोस्ट तैयार हो जाती है। इस कंपोस्ट की खपत शहर में हो जाती है। शहर के ही लोग अपने गमलों में, घर में लगाए गए फलदार पेड़ों और बागवानी के लिए कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट को जल्द ही आगे भी बढ़ाया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें