चकरनगर। चंबल के बीहड़ों में इन दिनों तेंदुए खूब दहाड़ मार रहे हैं। लोगों का मानना है कि इनकी संख्या आधा सैकड़ा पहुंच गई है। तेंदुए के खौफ से ग्रामीण खासे परेशान हैं। उन्होंने बीहड़ की ओर जाना छोड़ दिया है। चरवाहों ने जानवरों और बकरियों को चराना बंद कर दिया है।
ग्रामीण कन्हैया यादव, रमेश तिवारी ने बताया कि बकरियां चराने के लिए रोज जंगल में जाना पड़ता है। पिछले एक सप्ताह से शाम के समय तेंदुआ की दहाड़ खेरा मंदिर की तरफ सुनाई देती है। जिसके कारण लोगों ने उस तरफ बकरियां ले जाना बंद कर दिया है।
अपनी बकरियों को पुल के नीचे ही आसपास जंगल में सुरक्षित स्थान पर चराते हैं। यमुना नदी के किनारे खेतीबाड़ी करने वाले बेटी ठाकुर, कमल चौहान, होम सिंह ने बताया कि पिछले दिनों से तेंदुए दिन के समय भी मंदिर के निकट चहलकदमी करते देखा गया है।
रात के समय तेंदुआ दहाड़े मारता है। जिसके चलते हम लोगों ने रात में खेतों की फसलों से रखवाली करना भी बंद कर दिया है। मोनू सिंह व सुरजीत सिंह ने बताया कि खाना पकाने के लिए लकड़ी लेने बीहड़ में शनिवार को गए थे। वहां तेंदुआ की दहाड़ सुनकर डर से भाग आए।
चंबल सेंच्युरी क्षेत्राधिकारी हरि किशोर शुक्ला ने बताया कि चिकनी टावर से भी तेंदुआ अपने शावकों को लेकर जंगल में निकल गया है। पिछले दिनों सर्चिंग के दौरान वह अपनी मौज में लौट कर नहीं आया है।
इस वक्त चंबल के बीहड़ों में आधा सैकड़ा से अधिक तेंदुए होने का अनुमान लगाया जा रहा है। नदियों के किनारे बीहड़ों में उनकी चहलकदमी बढ़ रही है। ग्रामीणों से अपील है कि वह संबंधित जंगलों में ना जाएं अपनी जान जोखिम में ना डालें।