इटावा। अपर सत्र न्यायाधीश ने मारपीट और जानलेवा हमले से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने तीन आरोपियों, रामचंद्र, उनकी पुत्री ज्योति और पत्नी अंगूरी देवी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। वहीं, मामले के शिकायतकर्ता राजेश कुमार के खिलाफ अदालत में जानबूझकर झूठी गवाही देने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराने के आदेश दिए हैं।
चौबिया थाना क्षेत्र के ग्राम घुसूपुरा के राजेश कुमार ने 25 फरवरी 2017 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें आरोप लगाया था कि रामचंद्र, ज्योति और अंगूरी देवी ने उनकी पत्नी राधा देवी को लाठी-डंडों और लात-घूसों से पीटा था। डॉक्टरी परीक्षण में राधा देवी के सिर की हड्डी में फ्रैक्चर पाया गया था जिसे मेडिकल रिपोर्ट में गंभीर चोट बताया गया था।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य गवाह राजेश कुमार और पीड़ित महिला राधा देवी दोनों अपने बयानों से मुकर गए। राजेश कुमार ने स्वीकार किया कि वह घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं थे और इटावा शहर में काम कर रहे थे। इसी तरह पीड़ित राधा देवी ने अदालत में कहा कि भीड़ में धक्का लगने के कारण वह ईंट-पत्थरों पर गिर गई थीं जिससे उन्हें चोट आई और आरोपियों ने उनके साथ कोई मारपीट नहीं की थी। अदालत ने पाया कि वादी और पीड़िता ने आरोपियों को फंसाने के उद्देश्य से जानबूझकर विरोधाभासी साक्ष्य दिए हैं। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि मुख्य गवाहों के अपने बयानों से पलटने के कारण आरोपियों को दोषी ठहराने का कोई आधार नहीं बचता।